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Panchang & Rahukalam

राहु काल बेला
 
  रविवार सायं  04.30 से 6.00 बजे तक
  सोमवार सायं  07.30 से 9.00 बजे तक
  मंगलवार दोपहर 03.00 से 4.00 बजे तक
  बुधवार दोपहर 12.30 से 1.30 बजे तक
  गुरूवार दोपहर 01.30 से 3.00 बजे तक
  शुक्रवार प्रात: 10.30 से 12.00 बजे तक
  शनिवार प्रात: 9.00 से 01.30 बजे तक
 
Free Online Panchang

Date January 19,2018
Place Delhi,Delhi,India
Latitude 028.40.N
Longitude 077.13.E
Time Zone 05.30 Hrs.
DST 0.0 Hrs.
Date
Day Month Year
Country
Place Of Birth

                                                
Panchang for January 19,2018 at 07:11 (Sun Rise Time)
Tithi Krishan Paksh 15 (Amavas) upto 11 hr. 45 mt. (28/01/1960) Next Tithi- Shukla Paksh 1 (Pratipada(Ekam))
Day Thursday
Nakshatra Sravana upto 03 hr. 02 mt. (29/01/1960) Next Nak- Dhanistha
Karan Naga upto 11 hr. 45 mt. (28/01/1960) Next Karan- Kintughna
Karan Kintughna upto 07 hr. 11 mt. (28/01/1960) Next Karan- Bava
Yoga Siddhi upto 19 hr. 49 mt. (28/01/1960) Next Yoga- Vyatipata
Mon Sign Capricorn 11°14' upto 14 hr. 08 mt. (29/01/1960) Next Sign- Aquarius
Sun Rise 17hr.55mt.
Sun Set 0.0 Hrs.
Rahu Kaal From 13hr.54mt.- 15hr.14mt.


* Above timings are the starting time of choghadia or hora .
* Time more then 23.59 Hr. means the next day (deduct 24 Hrs. from the time).

समय को मापने की जो पाँच इकाईयां हैं वार, योग, तिथि, करण, नक्षत्र जिनसे मिलकर पंचांग बनता है उसमें पहला स्थान वारों को प्राप्त है, इन वारों और इनके स्वामियों को अनुकूल बनाकर आप अपनी ग्रहस्थितियों का श्रेष्ठ फल प्राप्त कर सकते हैं और इसका अच्छा तरीका है उस ग्रह के वार का वर्त करना I आईये जानिए किस वार के व्रत से किन शुभ फलों की प्राप्ति होती है और इसकी सही विधि क्या है ?.........

अपनी कुण्डली के आधार पर संस्था के ज्योतिषीयों से जानिए कौन सा व्रत आपके लिए सर्वश्रेष्ठ है, मात्र व्रत करते- करते ही आप अपनी कुंडली और ग्रहदशाओं को बदल सकते हैं I जानिए मात्र Rs. 100/- में कुण्डली से व्रत का निर्णय-
व्रतों से करें मनोकामनापूर्ति

भारतीय ज्योतिष ने ग्रह शांति के अनेक उपाय बताए हैं, जिसमें व्रत अथवा सविधि उपवास भी एक है I हमारे देश में व्रत एवं उपवास का सर्वाधिक प्रचलन है I मानव जीवन को सफल बनाने में व्रत एवं उपवास की बड़ी महिमा है I यदि जन्म कुण्डली से अनिष्टकारी ग्रहों की जानकारी प्राप्त होती है उस ग्रह के वार के दिन उपवास कीजिये I यदि जन्मकुण्डली नहीं है, राशि भी ज्ञात नहीं है इस स्थिति में विशेष उद्देश्य के लिए विशेष वार को व्रत करें I

रविवार को व्रत

रविवार को व्रत करने से नेत्र पीड़ा से मुक्ति तथा सौभाग्य वृद्धि होती है I रोगों से लड़ने की शक्ति प्राप्त होती है I इस दिन गुड़, गेहूँ तथा घी का सेवन व्रत समाप्ति पर अवश्य करना चाहिए I रविवार का व्रत किसी माह के शुक्ल पक्ष से प्रारम्भ कर बारह, तीस अथवा एक वर्ष तक व्रत करना चाहिए I

सोमवार का व्रत

सोमवार का व्रत मानसिक शांति तथा सन्तान सुख देता है I इस दिन दूध, दही तथा सफेद पदार्थों का सेवन करना चाहिए I सोमवार का व्रत किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार से अथवा चैत्र, वैशाख, श्रावण या कार्तिक माह से प्रारम्भ करना चाहिए I व्रत कम से कम दस और अधिकतम सोलह सोमवार तक उत्तम फलदायक होता है I

मंगलवार का व्रत

सन्तान, उत्तम जीवन साथी प्राप्ति, भयमुक्ति, ऋण मुक्ति तथा मान एवं भवन की प्राप्ति के लिए मंगलवार का व्रत श्रेष्ठ है I गुड़, चना का अवश्य सेवन करें I इससे मंगल एवं केतु दोनों प्रसन्न होते हैं I मंगलवार का व्रत किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार से प्रारंभ कर 21 अथवा 45 व्रत करें I

बुधवार का व्रत

उत्तम एवं उच्च शिक्षा तथा व्यापार वृद्धि के लिए बुधवार का व्रत सर्वोत्तम है I हरा मूँग एवं फल अवश्य सेवन करें I यह व्रत किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार से प्रारंभ कर 21 अथवा 45 व्रत करें I

बृहस्पतिवार का व्रत

सुख- समृद्धि एवं संतान के साथ उत्तम विवाह का कारक है I व्यापार वृद्धि के लिए यह व्रत उत्तम फलदायक है I इस दिन पीले पदार्थों का सेवन कर केले के वृक्ष में जल चढ़ाकर उसकी पूजा करना चाहिए I यह व्रत भी किसी शुक्लपक्ष के गुरुवार से प्रारंभ कर एक वर्ष तक अथवा सोलह व्रत करना चाहिए I

शुक्रवार का व्रत

सांसारिक सुख देता है तथा पारिवारिक कलह कम करता है I दूध, चावल का सेवन कर सफ़ेद वस्त्र धारण करें I 21 अथवा 31 व्रत किसी शुक्लपक्ष के प्रथम शुक्रवार से प्रारंभ करें I

शनिवार का व्रत

शनिवार के व्रत से शनि के साथ राहु की पीड़ा भी शांत होती है I कारखानों में उत्तम कारोबार के लिए यह रामबाण व्रत है I उड़द, तिल तथा केले का सेवन करें I इस दिन चीटियों के बिल पर आटा तथा कबूतरों को दाना चुगाना विशेष फलदायक है I 21 अथवा 51 व्रत शुक्लपक्ष के प्रथम शनिवार से प्रारंभ करें I 

उपर्युक्त सभी व्रतों का महत्त्व है I व्रत कीजिये, स्वस्थ रहिए और समृद्ध बनिए I व्रत उपवास के प्रभाव से आत्मशुद्धि होती है I संकल्प शक्ति बढ़ती है I मनुष्य की बुद्धि, विचार, विवेक एवं ज्ञानतंतु विकसित होते हैं I वैसे तो व्रत और उपवास दोनों एक है, किन्तु दोनों में भिन्नता यह है कि व्रत में भोजन किया जा सकता है और उपवास में निराहार रहना पड़ता है I व्रत तथा उपवास के प्रभाव से उत्तम स्वास्थ तथा दीर्घ जीवन की प्राप्ति होती है I सही अर्थों में आज के भौतिक युग में मानव मात्र के कल्याण के लिए व्रत और उपवास स्वर्ग की सीढ़ी के साथ ही संसार सागर से तार देने वाली प्रत्यक्ष नौका है- जिसमें सभी को सवार होना चाहिए I