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NUMEROLOGY

अंकों का रहस्यमयी संसार

अंकों के रहस्यमयी संसार में आपका स्वागत है I अंक विद्या ज्योतिष शास्त्र का एक महत्वपूर्ण अंग है I वास्तव में अंकों का संसार अति विचित्र, अद्भुत और चौंकाने वाला है I यों तो हस्तरेखा शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र आदि अनेकों ऐसे शास्त्र हैं जो हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं, भविष्य का संकेत करते हैं लेकिन इन सबका आधार अंक ज्योतिष ही है I बिना अंकों की सहायता लिए ये शास्त्र अपने फलों को उजागर नहीं कर सकते I हमारा पूरा जीवन इन अंकों के उलट- फेर में ही बीतता है I जीवन का ऐसा कोई क्षण नहीं होता जब हम इन अंकों से प्रभावित नहीं होते I प्रत्येक दिन, प्रत्येक समय इन अंकों से हमारा सम्बन्ध और भी अधिक गहरा होता चला जाता है I

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मूलांक - 1 (जन्म दिनांक - 1,10,19,28)
मूलांक 1 वाले व्यक्ति अधिक सहिष्णु, सहनशील एवं गंभीर होते हैं I इनके जीवन में निरंतर उत्थान- पतन होते रहते हैं तथा संघर्ष इनके जीवन का प्रमुख बिंदु होता है I नेतृत्व की भावना भी प्रबल होती है और जिस कार्य को भी अपने हाथ में लेते हैं, उसे अच्छी तरह निभाते एवं सम्पन्न करने का सामर्थ्य भी रखते हैं I
नौकरी करने वाले मूलांक 1 के धनि, शीघ्र उच्च पद पर आसीन होने की चेष्टा करेंगे तथा व्यापारी व्यक्ति दिन- रात परिश्रम कर व्यापारी वर्ग में प्रमुख स्थान बना सकने में समर्थ होगा I चाहे व्यापारिक कार्य हों चाहे नौकरी, नेतृत्व वर्ग में कोई कमी नहीं आएगी I ये निर्णय लेने में भी चतुर होते हैं, स्वतंत्र एवं स्वस्थ चिन्तन इनकी विशेषता है, इनका व्यक्तित्व स्वत: ही अलग- अलग सा दिखाई देगा, किसी के दबाव में रहकर कार्य करनेवाले ये नहीं I समाज में परिवर्तन, जीवन में परिवर्तन और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में परिवर्तन इनका स्वभाव है I सुन्दर, सुरुचिपूर्ण जीवन में ये विश्वास रखते हैं I ऐसे व्यक्ति जीवन को जीना जानते हैं I
शुभ वर्ष   यदि आपका मूलांक 1 है तो आपके जीवन में निम्नलिखित वर्ष बहुत ही महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे I
1, 2, 4, 7, 10, 11, 13, 16, 19, 20, 22, 25, 28, 29, 31, 33, 34, 37, 38, 40, 46, 47, 49, 52, 55, 56, 58, 61, 63, 64, 65 I
इसके अतिरिक्त आपके जीवन में कुछ शुभ वर्ष भी होते हैं जिनमें आपको विशेष लाभ प्राप्त होते हैं और सफलता की सीढियाँ चढ़ते हैं I  आपके जीवन में शुभ वर्ष - 1, 10, 19, 28, 37, 46, 55, 64 तथा 73वां वर्ष है I
शुभ तिथि  1 अंक वाले व्यक्तियों के लिए 1, 10, 19, 28 तिथि शुभ होती है I अतः किसी भी काम में सफलता प्राप्त करनें के लिए आपको मुख्य रूप से इन्हीं तिथियों का उपयोग करना चाहिए I इन तिथियों के अतिरिक्त 2, 4 तथा 7 भी आपके लिए विशेष शुभ होती हैं I इस अंक वाले व्यक्ति यदि 21 जुलाई से 22 अगस्त के बीच उक्त शुभ तिथियों में कोई कार्य आरम्भ करें तो इन्हें विशेष सफलता प्राप्त होती है क्योंकि इस बीच सूर्य का प्रभाव विशेष रूप से परिलक्षित होता है जो की मूल अंक 1 का स्वामी है I 2 के अंक का स्वामी चंद्रमा है जोकि सूर्य का मित्र है इसलिए 2 तथा उसके यौगिक अंकों को भी 1 मूल अंक वाले के लिए शुभ माना गया है I
आपके शुभ दिन  1 अंक वाले व्यक्तियों के लिए रविवार एवं सोमवार शुभ दिवस होते हैं I यदि उक्त शुभ तिथियों में विशेषकर 1, 10, 19, 28 तथा 4, 13, 22 तारीख को रविवार का दिन पड़े तो बहुत शुभ होता है I सोमवार का दिन अच्छा रहता है I
आपका स्वास्थ्य   इस अंक से प्रभावित व्यक्तियों को तीव्र ज्वर, हृदय रोग, दायीं आँख का दुखना,
चर्म रोग, चोट, कोढ़, मस्तिष्क सम्बन्धी परेशानियाँ, आंतों के रोग तथा घुटनों के पतलेपन आदि की शिकायते होती है I ये व्यक्ति किसी न किसी रूप में हृदय से सम्बंधित रोगों से पीड़ित होते हैं I इनके दिल की धड़कन और रक्त प्रवाह अनियमित हो जाता है I उचित है आप समय- समय पर आँखों का परीक्षण करवाते रहे I
उपयोगी सब्जी, फल एवं जड़ी- बूटियाँ  अंक 1 वाले व्यक्तियों के लिए किशमिश, सौंफ, केसर, लौंग, जायफल, संतरा, नींबू, मौसम्बी, खजूर, अदरक, सौंठ, जौ, जौ की रोटी, जौ का पानी, पालक, गाजर आदि उपयोगी हैं I
व्यायाम  आपके लिए उत्तम है की आप सूर्य नमस्कार आसनों का क्रम से एक चक्र भली प्रकार पूर्ण करें, लेकिन यदि हृदय रोग हो चुका है तो न करें I
व्रत  इन्हें रविवार के दिन व्रत रखना चाहिए I भोजन एक समय करना चाहिए और नमक नहीं खाना चाहिए I
उपासना  इन लोगों का इष्ट सूर्य है I इन्हें पूर्व दिशा में उगते हुए सूर्य के दर्शन करने चाहिए और उसी की उपासना भी करनी चाहिए I
आपका कैरियर  मूलांक 1 वाले व्यक्ति अधिक सहिष्णु, सहनशील एवं गंभीर होते हैं I इनके जीवन में निरंतर उत्थान- पतन होते रहते हैं तथा संघर्ष इनके जीवन का प्रमुख बिंदु होता है I नेतृत्व की भावना भी प्रबल होती है और जिस कार्य को भी अपने हाथ में लेते हैं, उसे अच्छी तरह निभाते एवं सम्पन्न करने का सामर्थ्य भी रखते हैं I जिनका मूल अंक 1 हो वे व्यक्ति निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं :-
बिजली, सर्जरी, राजदूत, विज्ञान, खोज आदि का कार्य या जहाजों से सम्बन्ध रखने वाले कल- पुर्जे तह जवाहरात आदि का कार्य कर सकते हैं I प्रशासनिक सेवा, विद्युत और उससे सम्बंधित व्यवसाय, आभूषण, नेतृत्व से सम्बंधित, समुद्री व्यापार, सरकारी कार्यों की ठेकेदारी आदि I
आपका जीवनसाथी    इस अंक वाले व्यक्ति को उन लोगों के साथ विवाह अथवा मैत्री सम्बन्ध स्थापित करना उत्तम रहता है जिनका जन्म 15 जून से 14 जुलाई के बीच, 15 सितम्बर से 14 अक्टूबर के बीच, 15 नवम्बर से 14 दिसम्बर के बीच, 15 मार्च से 14 अप्रैल के बीच तथा 15 अप्रैल से 14 मई के बीच हुआ हो I इसके अतिरिक्त अंक 1 वाले उन लोगों के साथ भी अपना सम्बन्ध स्थापित कर सकते हैं जिनका मूल अंक 5,7 या 9 आता हो I
शुभ रंग, रत्न एवं धातु   
                            अनुकूल रंग : इस अंक वाले व्यक्तियों के लिए सबसे उपर्युक्त और अनुकूल रंग सुनहरी पीला या पीलापन लिए हुए भूरा होता है I यदि पीले रंग के वस्त्र पहनने में असहज महसूस करें तो पीले रंग के परिवार से संबंधित अन्य जो सैंकड़ों रंग है जैसे कापरी, केसरी, पीच, लाईट ओरेंज, क्रीम कलर आदि का प्रयोग पहनने में एवं अपने घर की दीवारों, गाड़ी की सीट कवर, घर की इंटीरियर आदि में प्रयोग कर सकते है I
                            रत्न एवं धातु : माणिक्य आपका मुख्य रत्न है I इसे अंग्रेजी में रूबी कहते हैं I धातुओं में आप स्वर्ण का उपयोग करें I अंगूठी आदि भी स्वर्ण में ही बनवा कर पहननी चाहिए I सोने की अंगूठी में रत्न इस तरह जड़वाएं की वह आपकी त्वचा से स्पर्श करता रहे I
अंक 1 के लिए यंत्र, मन्त्र एवं देवता  जिन व्यक्तियों का जन्म 15 अगस्त से 14 सितम्बर के बीच हुआ हो अथवा जिनकी जन्म तिथि या नाम के वर्णों ला मूल अंक 1 हो, उन पर सूर्य का विशेष प्रभाव रहता है अतः ऐसे व्यक्तियों को सूर्य का यंत्र धारण करना चाहिए I इस यंत्र को सोने की अंगूठी पर खुदवाकर मध्यमा अंगुली में धारण करना चाहिए I सोने के पत्र पर यह यंत्र खुदवाकर दायीं भुजा पर ताबीज के रूप में बांध भी सकते हैं I आप चाहें तो इस यंत्र को भोजपत्र पर केसर अथवा कुमकुम की स्याही से अनार की कलम से लिखकर, मन्त्र आदि पढ़कर यंत्र को सिद्ध कर सोने, चांदी या तांबे का ताबीज में बंद कर, दायें हाथ के बाजू में धारण कर सकते है I यंत्र को धारण करने से पहले निम्न मन्त्र की 11 माला जपकर यंत्र को सिद्ध अवश्य
कर ले I  अंक अनुसार आपके शुभ देवता सूर्य है अतः सूर्यदेवता का स्मरण अवश्य करें I
 

मन्त्र :- ॐ घृणि सूर्याय नमः I

मूलांक - 2 (जन्म दिनांक - 2,11,20,29)
मूलांक 2 से सम्बंधित व्यक्ति अधिक कल्पनाशील, भावुक, सहृदय, सरलचित्त एवं कोमलप्रान होते हैं ये नई से नई कल्पनाओं की दृष्टि में रमें रहते हैं I ऐसे व्यक्ति न तो अधिक समय तक एक ही कार्य पर स्थिर रह सकते हैं और न ही लम्बे समय तक सोच सकते हैं I इन्हें नित्य नए विचार सूझते हैं और उन्हें क्रियान्वित करने के लिए ये जूझते हुए दूर से ही दिखाई देते हैं I
आत्म विश्वास की इनमें कमी रहती है फलस्वरूप ये तुरंत निर्णय नहीं ले पाते I चाहे छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी समस्या हो, ये उसमें उलझे रहते हैं I यह काम करूं या नहीं करूं इस पर तुरंत निर्णय ले लेना इनके वश की बात नहीं I
स्वाभाव से शंकालु होते हुए भी दूसरों के भले का पूरा ध्यान रखते हैं I  "न" कहना इनके वश की बात नहीं I दूसरों के मन की बात जान लेने में ये प्रवीण होते हैं I ललित (आर्ट) कलाओं में इनकी रूचि जन्मजात होती है I

शुभ वर्ष   यदि आपका मूलांक 2 है तो आपके जीवन में निम्नलिखित वर्ष बहुत ही महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे I 1, 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25, 28, 31, 34, 43, 52, 55, 61, 64 और 73वां वर्ष है I
इसके अतिरिक्त आपके जीवन में कुछ शुभ वर्ष भी होते हैं जिनमें आपको विशेष लाभ प्राप्त होते हैं और सफलता की सीढियाँ चढ़ते हैं I  आपके जीवन में शुभ वर्ष - 2, 11, 20, 29, 38, 47, 56, 65 तथा 68वां वर्ष है I

शुभ तिथि  2 अंक वाले व्यक्तियों के लिए 2, 11, 20, 29 तिथि शुभ होती है I अतः किसी भी काम में सफलता प्राप्त करनें के लिए आपको मुख्य रूप से इन्हीं तिथियों का उपयोग करना चाहिए I इस अंक वाले व्यक्ति यदि 20 से 25 जुलाई के बीच उपरोक्त तिथियों में कोई कार्य आरम्भ करें तो विशेष सफलता की आशा की जा सकती है I
आपके शुभ दिन  2 अंक वाले व्यक्तियों के लिए रविवार, सोमवार एवं शुक्रवार शुभ दिवस होते हैं I यदि उक्त शुभ तिथियों में विशेषकर 2,11,20,29 तथा 7,16,25 तारीख को सोमवार का दिन पड़े तो बहुत शुभ होता है I  शुक्रवार एवं रविवार का दिन अच्छा रहता है I
आपका स्वास्थ्य   जिन व्यक्तियों का मूल अंक 2 होता है वे प्राय: पेट के रोगों से पीड़ित रहते हैं I इन्हें अपच, गैस, अफारा, मन्दाग्नि या अतिसार आदि रोग घेर सकते हैं I इन्हें चाहिए की आरम्भ से ही, भले ही उन्हें कोई भी रोग न हो, अपने भोजन पर नियंत्रण रखें I नियमित भोजन करें और सदैव भूख से कम भोजन करें I
इस अंक से प्रभावित व्यक्तियों को हृदय तथा फैफडों सम्बंधित बीमारियाँ, अपच, दायीं आँख में खराबी, अधिक नींद आना, दमा, अतिसार, रक्त की कमी, रक्त में विष होना, वामन, गुर्दे की बीमारियाँ, वीर्य- रोग, मासिक धर्म सम्बंधित शिकायतें, जलोदर, आँतों में फोड़ा तथा वक्षस्थल एवं स्तनों में होने वाली गांठ की बीमारियाँ होती हैं I

उपयोगी सब्जी, फल एवं जड़ी- बूटियाँ   अंक 2 वाले व्यक्तियों के लिए सलाद, ककड़ी, प्याज, गोभी, खीर उपयोगी है I फलों में तरबूज, खरबूज, केला, पपीता, सेब उपयोगी हैं I चकूंदर, अजवायन, आंवला, कमल ककड़ी एवं दनामैथी आदि उपयोगी हैं I
व्यायाम   2 अंक वालों को योगासनों में मयूरासन, सर्वांगासन, उत्तानपादासन और पवनमुक्तासन का नियमित व्यायाम करना चाहिए I  भले ही दस मिनट के लिए करें I इन्हें चाहिए की रात का खाना दिन छिपने के साथ ही के लें, जिससे इन्हें नींद अच्छी आये और भोजन से रस बनने में मदद मिले I सूर्य नमस्कार आपके लिए उत्तम आसन है I रात को ऐसे पदार्थ न खाए जो गैस उत्पन्न करें I
व्रत  इन लोगों को सोमवार का व्रत रखना चाहिए I आप चाहें तो पूर्णिमा एवं प्रदोष व्रत भी रख सकते हैं I
उपासना  2 मूल अंक वाले व्यक्तियों के आराध्य देवता शंकर हैं I  नित्य शंकर भगवन की आराधना करें I
आपका कैरियर  मूलांक 2 से सम्बंधित व्यक्ति अधिक कल्पनाशील, भावुक, सहृदय, सरलचित्त एवं कोमलप्रान होते हैं ये नई से नई कल्पनाओं की दृष्टि में रमें रहते हैं I ऐसे व्यक्ति न तो अधिक समय तक एक ही कार्य पर स्थिर रह सकते हैं और न ही लम्बे समय तक सोच सकते हैं I इन्हें नित्य नए विचार सूझते हैं और उन्हें क्रियान्वित करने के लिए ये जूझते हुए दूर से ही दिखाई देते हैं I जिनका मूल अंक 2 हो वे व्यक्ति निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं :-
 दलाली, होटल सम्बन्धी कार्य, तरल या रसदार पदार्थ, यात्रा, पत्रकारिता, गाना-बजाना, नृत्य, कविता, भूमि से सम्बंधित कार्य, बर्फ, चांदी, डेरी, कृषि और पशुपालन आदि कार्य I परिवहन से सम्बंधित और मोती जैसे रत्न का व्यापार, विभिन्न कला, आंतरिक सजावट और आर्किटेक्चर से सम्बंधित कार्य कर सकते हैं I

आपका जीवनसाथी   इस अंक वाले व्यक्ति को उन लोगों के साथ विवाह अथवा मैत्री सम्बन्ध स्थापित करना उत्तम रहता है जिनका जन्म 15 मई से 14 जून के बीच, 15 अक्टूबर से 14 नवम्बर के बीच तथा 15 फरवरी से 14 मार्च के बीच हुआ हो I इसके अतिरिक्त अंक 2 वाले व्यक्ति उन लोगों के साथ भी अपना सम्बन्ध स्थापित कर सकते हैं जिनका मूल अंक 4 तथा 6 आता हो I जिनके नाम का संक्षिप्त अंक 4 या 6 आता हो उनको भी आप अपना जीवनसाथी बना सकते हैं I
शुभ रंग, रत्न एवं धातु  
                           
अनुकूल रंग : आपके लिए हल्का हरा रंग बेहतर है I  आपको गहरे रंगों से बचना चाहिए I  भड़कीले और चमकीले कपडे आपके लिए हानिकारक हो सकते हैं I हो सके तो हल्के हरे रंग का रुमाल सदैव जेब में रखें I घर के परदे, सोफे के कुशन, दरी, चद्दरें आदि भी हल्के हरे रंग के रख सकते हैं I घर में हरे पौधे भी लगा सकते हैं I
                             
रत्न एवं धातु : आपके लिए सबसे उपयुक्त रत्न मोती है I  यह चंद्रमा का रत्न है और मन का करक है यह आपके मन पर नियंत्रण रखेगा अत: इसे सोमवार के दिन धारण करें I चांदी आपकी मुख्य धातु है इसमें आप मोती जादवा कर पहनें I मोती इस तरह जड़ा हो कि पहनने पर आपकी त्वचा को स्पर्श करता रहे I  महिलाएं नाक कि किल में छोटे मोती जड़वा कर पहने तो भी लाभ होगा I
अंक 2 के लिए यंत्र, मन्त्र एवं देवता  जिन व्यक्तियों का जन्म 15 जुलाई से 14 अगस्त  के बीच हुआ हो अथवा जिनकी जन्म तिथि या नाम के वर्णों ला मूल अंक 2 हो, उन पर चंद्रमा का विशेष प्रभाव रहता है अतः ऐसे व्यक्तियों को चंद्रमा का यंत्र धारण करना चाहिए I इस यंत्र को चांदी की अंगूठी पर खुदवाकर कनिष्ठा अंगुली  में धारण करना चाहिए I चांदी के पत्र पर यह यंत्र खुदवाकर दायीं भुजा पर ताबीज के रूप में बांध भी सकते हैं I आप चाहें तो इस यंत्र को भोजपत्र पर केसर अथवा कुमकुम की स्याही से अनार की कलम से लिखकर, मन्त्र आदि पढ़कर यंत्र को सिद्ध कर सोने, चांदी या तांबे का ताबीज में बंद कर, दायें हाथ के बाजू में धारण कर सकते है I यंत्र को धारण करने से पहले निम्न मन्त्र की 11 माला जपकर यंत्र को सिद्ध अवश्य कर ले I  अंक अनुसार आपके शुभ देवता शिव है अतः भगवान शिव का स्मरण अवश्य करें I
 

मन्त्र :- ॐ सों सोमाय नमः I

मूलांक - 3 (जन्म दिनांक - 3,12,21,30)
मूलांक 3 साहस, शक्ति एवं दृढ़ता का चिन्ह है I यह अंक श्रम का प्रतीक तथा संघर्ष का जीवन है और इस प्रकार के व्यक्तियों को पग- पग पर संघर्ष करना पड़ता है Iविचारों को व्यवस्थित रूप से अभिव्यक्त करने में ये कुशल होते हैं I अपनी भावनाओं एवं विचारों का जिस उत्तम रीति से ये दिग्दर्शन करा सकते हैं, वैसे अन्य कम होते हैं I
पैसों का संग्रह कठिनता से होता है I परिश्रम करके कमाने में ये दिन रात लगे रहते हैं I  पर जितना भी कमाते हैं, व्यय हो जाता है I संग्रह होने कि स्थिति कम ही दिखाई देती है I ऐसे व्यक्तियों कि महत्वकांक्षाएं बढ़ी- चढ़ी होती हैं I  शीघ्र से शीघ्र उन्नति के शिखर पर पहुंचें, यही इनकी महत्वकांक्षा होती है I छोटा पद, छोटा कोष, छोटा कार्य इन्हें पसंद नहीं I  रक्त से सम्बंधित व्यक्ति एवं भाइयों से इन्हें विशेष लाभ नहीं होता I यह बात अलग है कि ये लचीले स्वाभाव के कारण निभा जाते हैं परन्तु फिर भी पारिवारिक घनिष्ठता में संदेह ही रहता है I

शुभ वर्ष  यदि आपका मूलांक 3 है तो आपके जीवन में निम्नलिखित वर्ष बहुत ही महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे I 3, 6, 9, 12, 18, 21, 24, 27, 30, 33, 36, 39, 42, 45, 48, 51, 54, 57 और 66 वां वर्ष I
इसके अतिरिक्त आपके जीवन में कुछ शुभ वर्ष भी होते हैं जिनमें आपको विशेष लाभ प्राप्त होते हैं और सफलता की सीढियाँ चढ़ते हैं I  आपके जीवन में शुभ वर्ष -  3, 12, 21, 30, 48, 57 तथा 75वां वर्ष है I

शुभ तिथि  3 अंक वाले व्यक्तियों के लिए 3, 12, 21, 30 तिथि शुभ होती है I अतः किसी भी काम में सफलता प्राप्त करनें के लिए आपको मुख्य रूप से इन्हीं तिथियों का उपयोग करना चाहिए I इन तिथियों के अतिरिक्त 9, 18 तथा 27 भी आपके लिए विशेष शुभ होती हैं I इस अंक वाले व्यक्ति यदि 19 फरवरी से 21 मार्च के बीच उक्त शुभ तिथियों में कोई कार्य आरम्भ करें तो इन्हें विशेष सफलता प्राप्त होती है I 3 के अंक की 6 तथा 9 के अंक के साथ भी सहानुभूति होती है अतः इनसे सम्बंधित तिथियाँ भी शुभ रहती है I
आपके शुभ दिन  3 अंक वाले व्यक्तियों के लिए मंगलवार, ब्रहस्पतिवार एवं शुक्रवार शुभ दिवस होते हैं I यदि उक्त शुभ तिथियों में विशेषकर3, 12, 21 तथा 30 तारीख को ब्रहस्पतिवार का दिन पड़े तो बहुत शुभ होता है I इसके अतिरिक्त मंगलवार एवं शुक्रवार का दिन भी विशेष शुभ होता है I
आपका स्वास्थ्य  जिन व्यक्तियों का मूल अंक 3 होता है उनकी हड्डियों में प्राय दर्द रहता है और थकावट सी रहती है I इस अंक से प्रभावित अत्यधिक परिश्रमी होते हैं और सदैव अपने कार्य को पूर्ण करने में विश्वास करते है अतः अतिपरिश्रम के कारण वे थके- थके से रहते हैं I इनका स्नायु तंत्र कमज़ोर हो जाता है I इन व्यक्तियों को मधुमेह, स्मरण शक्ति की कमी हकलाना, तुतलाना, प्लीहा, जलोदर, त्वचा रोग हो जाते हैं I
उपयोगी सब्जी, फल एवं जड़ी- बूटियाँ अंक 3 वाले व्यक्तियों के लिए फलों में चेरी, स्ट्राबेरी, सेब, शहतूत , नाशपाती, अनार, अन्नानास, अंगूर उपयोगी रहते हैं I जड़ी- बूटियों में शतावर, जैतून, केसर, जायफल, लौंग, बादाम, अंजीर आदि लाभदायक रहते हैं I
व्यायाम  3 अंक वाले व्यक्तियों को शीर्षासन, धनुरासन और सूर्य नमस्कार आदि योगासनों का अभ्यास करना चाहिए I शवासन भी करें, आपको थकान का अनुभव नहीं होगा I
व्रत   इन्हें चाहिए की ये पूर्णिमा का व्रत करें I यदि बीमार होन तो गुरुवार को भोजन न करें I
उपासना  इन्हें विष्णु जी की उपासना करनी चाहिए I  विष्णुसहस्त्रनाम का जप करें और सत्यनारायण की कथा करें I
आपका कैरियर  मूलांक 3 साहस, शक्ति एवं दृढ़ता का चिन्ह है I यह अंक श्रम का प्रतीक तथा संघर्ष का जीवन है और इस प्रकार के व्यक्तियों को पग- पग पर संघर्ष करना पड़ता है I विचारों को व्यवस्थित रूप से अभिव्यक्त करने में ये कुशल होते हैं I अपनी भावनाओं एवं विचारों का जिस उत्तम रीति से ये दिग्दर्शन करा सकते हैं, वैसे अन्य कम होते हैं I जिनका मूल अंक 3 हो वे व्यक्ति निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं :-
शिक्षा, सेवा, अदालती, राजदूत, वकालत, पुलिस, दर्शन, विज्ञान, बैंक तथा विज्ञापन आदि के कार्य कर सकते हैं I त्वचा, रक्त, उदर सम्बंधित दवाईयों और उपकरणों से सम्बंधित कार्य भी कर सकते हैं I

आपका जीवनसाथी   इस अंक वाले व्यक्ति को उन लोगों के साथ विवाह अथवा मैत्री सम्बन्ध स्थापित करना उत्तम रहता है जिनका जन्म 15 नवम्बर से 14 दिसम्बर के बीच,15 दिसम्बर से 14 जनवरी के बीच, 15 मार्च से 14 अप्रैल के बीच तथा 15 अप्रैल से 14 मई के बीच हुआ हो I इसके अतिरिक्त अंक 3 वाले उन लोगों के साथ भी अपना सम्बन्ध स्थापित कर सकते हैं जिनका मूल अंक 3,7 या 9 आता हो I इसके अतिरिक्त जिनके नाम का संक्षिप्त अंक 3,7 या 9 आता हो उनको भी आप अपना जीवनसाथी बना सकते हैं I
शुभ रंग, रत्न एवं धातु   
                           
अनुकूल रंग : इस अंक वाले व्यक्तियों के लिए पीला, केसरिया, चाकलेटी, चमकीला गुलाबी, हल्का जमुनी रंग शुभत्व प्रदान करने वाले हैं I आपको उक्त रंग के ही वस्त्र, फर्नीचर, पर्दे, जालियां, बैडशीट, तकिये, कुशन, गिलाफ, मोज़े, टाई, जूतें, कमरे कि दीवारें, रुमाल आदि रखने चाहिए I
                             रत्न एवं धातु : आपको जीवन की श्रेष्ठता के लिए दाहिने हाथ की तर्जनी उंगली में पाँच- छ: रत्ती का पीला "पुखराज" प्राण- प्रतिष्ठायुक्त, शुभ दिन, शुभ मुहूर्त में धारण करना चाहिए I पुखराज सुन्दर, सुदोल, चमकीला, कान्तियुक्त हो तथा अंगूठी में इस तरह जड़वाएं की वह आपकी त्वचा से स्पर्श करे I आपकी शुभ धातु स्वर्ण है अतः पुखराज को स्वर्ण अंगूठी में जड़वाकर धारण करें I
अंक 3 के लिए यंत्र, मन्त्र एवं देवता  जिन व्यक्तियों का जन्म 15 दिसम्बर से 14 जनवरी के बीच हुआ हो अथवा जिनकी जन्म तिथि या नाम के वर्णों ला मूल अंक 3 हो, उन पर "बृहस्पति" ग्रह का विशेष प्रभाव रहता है अतः ऐसे व्यक्तियों को बृहस्पति का यंत्र धारण करना चाहिए I इस यंत्र को सोने की अंगूठी पर खुदवाकर तर्जनी अंगुली में धारण करना चाहिए I सोने के पत्र पर यह यंत्र खुदवाकर दायीं भुजा पर ताबीज के रूप में बांध भी सकते हैं I आप चाहें तो इस यंत्र को भोजपत्र पर केसर अथवा कुमकुम की स्याही से अनार की कलम से लिखकर, मन्त्र आदि पढ़कर यंत्र को सिद्ध कर सोने के ताबीज में बंद कर, दायें हाथ के बाजू में धारण कर सकते है I यंत्र को धारण करने से पहले निम्न मन्त्र की 11 माला जपकर यंत्र को सिद्ध अवश्य कर ले I  अंक अनुसार आपके शुभ देवता "विष्णु" है अतः भगवान विष्णु का स्मरण अवश्य करें I

मन्त्र :- ॐ बृम् बृहस्पतये नमः I

मूलांक - 4 (जन्म दिनांक - 4,13,22,31)
यह मूलांक विशेषत: उथल- पुथल से सम्बंधित है I ऐसे व्यक्ति जीवन में शांत बनकर बैठ जायें, यह संभव ही नहीं है I ये निरंतर क्रियाशील रहते हैं I ऐसे व्यक्ति बीच में कहीं नहीं है, या तो ये उन्नति के सर्वोच्च शिखर पर होंगे या फिर पतन के गहरे गर्त में I  कई बार ऐसा पढने या देखने में आया है की आज जो उन्नति की परकाष्ठा पर है, वही कल जेल के सींखचों में बंद है I इस प्रकार की घटनाएं अधिकांशत मूलांक चार- प्रधान व्यक्तियों के जीवन में ही घटित होती हैं I
भाग्य उन्नति में निरंतर उतार- चढाव इन्हें देखने पड़ते हैं I स्वभाव से ये बड़े क्रोधी एवं तुनकमिजाज होते हैं I मन से हटकर जरा सा भी कार्य हो जाने पर ये आपे से बहार हो जाते हैं I  लेकिन जितनी गति से क्रोध चढ़ता है, उतनी ही तीव्र गति से वह उतर भी जाता है I
जीवन में शत्रुओं की कमी नहीं रहती, ये एक शत्रु को परास्त करेंगे तो दस नए शत्रु पैदा होंगे I यद्यपि वे पीठ पीछे कुचक्र रचेंगे, षड्यंत्र करेंगे पर मुह के सामने कुछ भी नहीं कर पाएंगें I क्योंकि इनका व्यक्तित्व ही कुछ ऐसा होता है की शत्रु स्वत: ही परास्त हो जाते हैं I

शुभ वर्ष  यदि आपका मूलांक 4 है तो आपके जीवन में निम्नलिखित वर्ष बहुत ही महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे I 1, 2, 4, 10, 13, 19, 20, 22, 28, 29, 31, 37, 38, 40, 46, 49, 56, 58, 65 और 74वां वर्ष I
इसके अतिरिक्त आपके जीवन में कुछ शुभ वर्ष भी होते हैं जिनमें आपको विशेष लाभ प्राप्त होते हैं और सफलता की सीढियाँ चढ़ते हैं I  आपके जीवन में शुभ वर्ष - 4, 13, 22, 31, 40, 49, 58 तथा 67वां वर्ष है I

शुभ तिथि  4 अंक वाले व्यक्तियों के लिए 4, 13, 22, 31 तिथि शुभ होती है I अतः किसी भी काम में सफलता प्राप्त करनें के लिए आपको मुख्य रूप से इन्हीं तिथियों का उपयोग करना चाहिए I  इस अंक वाले व्यक्ति यदि 21 जून से 31 अगस् के बीच उक्त शुभ तिथियों में कोई कार्य आरम्भ करें तो इन्हें विशेष सफलता प्राप्त होती है I  4 के अंक की अंक 2 के साथ भी सहानुभूति होती है, इससे सम्बंधित तिथियां भी शुभ रहती हैं I
आपके शुभ दिन  4 अंक वाले व्यक्तियों के लिए सोमवार, शनिवार एवं रविवार शुभ दिवस होते हैं I यदि उक्त शुभ तिथियों में विशेषकर 4, 13, 22, 31 तारीख को शनिवार का दिन पड़े तो बहुत शुभ होता है I इसके अतिरिक्त रविवार एवं सोमवार का दिन भी विशेष शुभ होता है I
आपका स्वास्थ्य  जिनका मूल अंक चार होता है वे व्यक्ति प्राय: रक्त की कमी से पीड़ित रहते हैं I  रक्त की कमी से अनेक रोग आ घेरते हैं I  ऐसे व्यक्तियों को लोह्तत्व से युक्त भोजन करना चाहिए I इस अंक से प्रभावित व्यक्तियों को चलने- फिरने में तथा श्वास लेने में कष्ट होना, फैफड़ों की खराबी, पैरों का फटना, पैरों में दर्द, पैरों की अन्य बीमारियाँ, प्लीहा वृद्धि, अण्डकोश वृद्धि आदि रोग होते हैं I इन्हें गुर्दे से सम्बंधित रोग भी हो जाते हैं I इस अंक के प्रभाव से जातक मानसिक रूप से भी अस्वस्थ एवं तनावग्रस्त रहता है I इनमें सिर दर्द भी देखा गया है I
उपयोगी सब्जी, फल एवं जड़ी- बूटियाँ  अंक 4 वाले व्यक्तियों के लिए एक्यूप्रेशर पद्धति, एक्यूपंक्चर पद्धति, अति लाभदायी रहती है I आप यदि त्राटक का अभ्यास करें तो भी उत्तम है I आप नशीली चीजों से परहेज करें और तेज मसालेदार भोजन से बचें I शाकाहार पर अधिक ध्यान दें I आपके लिए तरकारी, लौकी, ककड़ी, खीरा उपयोगी सब्जियाँ हैं I आप फलों में अंगूर, सेब एवं अन्नानास का उपयोग अधिक करें I तुलसी, कालीमिर्च, बड़ी मूसली, साबुत हल्दी आपके लिए उपयोगी जड़ी- बूटियाँ हो सकती हैं I
व्यायाम  यदि इस अंक वाले व्यक्ति आरम्भ से ही योगासन करते रहे अथवा छोटी- मोटी कसरत करते रहे तो उनमें रक्त की कमी नहीं होती है I शीघ्र लाभ हेतू इन्हें सूर्य नमस्कार, शीर्षासन, सर्वांगासन, और शवासन करना चाहिए I यदि आप शीर्षासन नियमित रूप से करें तो आपको कभी भी रक्त की कमी से कष्ट नहीं उठाना पड़ेगा I
व्रत  इन्हें सोमवार और गणेश चतुर्थी का व्रत रखना चाहिए I गणेश चतुर्थी का व्रत सब प्रकार से शुभ रहेगा I
उपासना  इन्हें गणेश जी की उपासना करनी चाहिए I पूजा- अर्चना करने पर धन- धान्य की कमी नहीं होगी I
आपका कैरियर  यह मूलांक विशेषत: उथल- पुथल से सम्बंधित है I ऐसे व्यक्ति जीवन में शांत बनकर बैठ जायें, यह संभव ही नहीं है I ये निरंतर क्रियाशील रहते हैं I ऐसे व्यक्ति बीच में कहीं नहीं है, या तो ये उन्नति के सर्वोच्च शिखर पर होंगे या फिर पतन के गहरे गर्त में I  कई बार ऐसा पढने या देखने में आया है की आज जो उन्नति की परकाष्ठा पर है, वही कल जेल के सींखचों में बंद है I इस प्रकार की घटनाएं अधिकांशत मूलांक चार- प्रधान व्यक्तियों के जीवन में ही घटित होती हैं I जिनका मूल अंक 4 हो वे व्यक्ति निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं :-
 इंजीनियर, सेल्समैन, रोकड़ व बहीखाते का काम, वकालत, रेलवे, टेलीग्राफी, पत्रकारिता, तम्बाकू, दलाली, बीमा, लेखन, संपादन, ट्रांसपोर्ट, राजनीति से सम्बंधित कार्य कर सकते हैं I इसके अतिरिक्त ऐसे व्यक्ति ज्योतिष शास्त्र, पुरातत्व विज्ञान से सम्बंधित कार्य भी कर सकते हैं I

आपका जीवनसाथी   इस अंक वाले व्यक्ति को उन लोगों के साथ विवाह अथवा मैत्री सम्बन्ध स्थापित करना उत्तम रहता है जिनका जन्म 15 मई से 14 जून के बीच, 15 जुलाई से 14 अगस्त के बीच, तथा 15 अक्टूबर से 14 नवम्बर के बीच हुआ हो I इसके अतिरिक्त अंक 4 वाले उन लोगों के साथ भी अपना सम्बन्ध स्थापित कर सकते हैं जिनका मूल अंक 2 या 6 आता हो अथवा जिनके नाम का संक्षिप्त अंक 2 या 6 आता हो I
शुभ रंग, रत्न एवं धातु   
                           
अनुकूल रंग : आपके लिए चटकदार रंग उपयुक्त हैं अतः आप चमकदार नीला रंग, तेज लाल, केसरिया आदि रंगों का उपयोग करें I आप भूरा एवं क्रिम रंग का उपयोग भी कर सकते हैं I आपके घर के परदे, जालियां,सोफे के कुशन, दरी, चद्दरें, टी- सेट, दीवारों का रंग आदि उपरोक्त रंगों में से हो तो आपके लिए बहुत शुभ रहेगा I
                            
रत्न एवं धातु : आपका सौभाग्यवर्धक रत्न नीलम है I नीलम आपके अनुकूल होने पर आपको धन- धान्य की कमी नहीं रहेगी I आपको नीलम अनुकूल न लगे तो आप गोमेद भी पहन सकते हैं I प्रतिकूल समय में आपको 4-5 रत्ती का चिकना, सुडौल, चमकीला, कान्तियुक्त, उभरा हुआ एवं पारदर्शी नीलम प्राण- प्रतिष्ठायुक्त धारण करना चाहिए I आपके लिए शुभ धातु पंचधातु है अतः नीलम को पंचधातु की अंगूठी में जड्वाकर धारण करें I नीलम इस तरह जड़ा हो की पहनने पर आपकी त्वचा को स्पर्श करे I
अंक 4 के लिए यंत्र, मन्त्र एवं देवता  जिन व्यक्तियों का जन्म 15 फरवरी से 14 मार्च के बीच हुआ हो अथवा जिनकी जन्म तिथि या नाम के वर्णों ला मूल अंक 4 हो, उन पर "हर्षल" ग्रह का विशेष प्रभाव रहता है I अंक 4 को शनि अथवा राहु से प्रभावित भी माना जाता है I अतः ऐसे व्यक्तियों को राहु का यंत्र धारण करना चाहिए I इस यंत्र को लोहे की अंगूठी पर खुदवाकर मध्यम अंगुली  में धारण करना चाहिए I लोहे के पत्र पर यह यंत्र खुदवाकर किसी भी भुजा पर ताबीज के रूप में बांध भी सकते हैं I आप चाहें तो इस यंत्र को भोजपत्र पर केसर अथवा कुमकुम की स्याही से अनार की कलम से लिखकर, मन्त्र आदि पढ़कर यंत्र को सिद्ध कर लोहे के ताबीज में बंद कर, दायें हाथ के बाजू में धारण कर सकते है I यंत्र को धारण करने से पहले निम्न मन्त्र की 11 माला जपकर यंत्र को सिद्ध अवश्य कर ले I  अंक अनुसार आपके शुभ देवता हैं "गणेश" अतः भगवान गणपति का स्मरण अवश्य करें I
 

मन्त्र :- ॐ रां राहवे नमः I

मूलांक - 5 (जन्म दिनांक - 5,14,23)
मूलांक 5 एक विचार प्रधान अंक है जिसके धनी नई से नई युक्तियाँ, नए से नए विचार एवं सर्वथा नूतन तर्कों से अनुप्राणित रहते हैं I ऐसे व्यक्ति पूर्णत: क्रियाशील होते हैं I वे झुकते नहीं, झुकाने में विश्वास रखते हैं I
इनके जीवन का सबसे बड़ा गुण है, दूसरों को सम्मोहित करने की कला I कुछ ही क्षणों की बातचीत में ये दूसरों को अपना बना लेते हैं, यही नहीं उसे अपना स्थायी मित्र भी बना लेते हैं I
मस्तिष्क उर्वर तथा बुद्धि प्रखर होती है, परन्तु निर्णय लेना इनका सबसे बड़ा गुण है, अपरिचित व्यक्ति को देखते ही ये भांप जाते हैं - वह क्यों आया है ? मुझसे क्या चाहता है ? और उसे क्या देना है I इसका तुरंत और पूर्व निर्णय ले लेना इनकी विशेषता होती है I
पूर्ण एकाग्र होकर कार्य पर जुट जाना इनकी दूसरी बड़ी विशेषता होती है I जो भी कार्य हाथ में लेंगे, उसे तब तक नहीं छोड़ेंगे जब तक की वह पूर्णत: सम्पन्न न हो जाये I
जीवन में एक से अधिक आजीविका से द्रव्य प्राप्त करेंगे यानि आय के स्तोत्र एक से अधिक होंगे I  मस्तिष्क इनका मुख्यत: व्यापार प्रधान होगा तथा बालू से भी पैसा बना लेना इनके मस्तिष्क की विशेषता कही जाएगी I

शुभ वर्ष  यदि आपका मूलांक 5 है तो आपके जीवन में निम्नलिखित वर्ष बहुत ही महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे I 5, 14, 23, 32, 41, 50, 59, 68 और 77वां वर्ष I
इसके अतिरिक्त आपके जीवन में कुछ शुभ वर्ष भी होते हैं जिनमें आपको विशेष लाभ प्राप्त होते हैं और सफलता की सीढियाँ चढ़ते हैं I  आपके जीवन में शुभ वर्ष - 5, 14, 23, 32, 41, 50, 59 तथा 68वां वर्ष है I

शुभ तिथि  5 अंक वाले व्यक्तियों के लिए 5, 14, 23 तिथि शुभ होती है I अतः किसी भी काम में सफलता प्राप्त करनें के लिए आपको मुख्य रूप से इन्हीं तिथियों का उपयोग करना चाहिए I  इस अंक वाले व्यक्ति यदि 21 मई से 23 जून अथवा 21 अगस्त से 26 सितम्बर के बीच उक्त शुभ तिथियों में कोई कार्य आरम्भ करें तो इन्हें विशेष सफलता प्राप्त होती है I 
आपके शुभ दिन  5 अंक वाले व्यक्तियों के लिए बुधवार, बृहस्पतिवार एवं शुक्रवार शुभ दिवस होते हैं I यदि उक्त शुभ तिथियों में विशेषकर 5, 14, 23 तारीख को बुधवार का दिन पड़े तो बहुत शुभ होता है I इसके अतिरिक्त बृहस्पतिवार एवं शुक्रवार का दिन भी विशेष शुभ होता है I
आपका स्वास्थ्य जिनका मूल अंक 5 होता है उन व्यक्तियों को प्राय: सर्दी, जुकाम, फ्लू आदि से पीड़ित रहना पड़ता है I इन्हें नर्वस ब्रेकडाउन का भी भय बना रहता है I
जिन व्यक्तियों का जन्म 15 जून से 14 जुलाई के बीच हुआ हो, उन्हें इस अंक के प्रभाव से कंठ रोग, जीभ सम्बंधित रोग, कंधे में दर्द, हड्डियों से सम्बंधित रोग, कान तथा श्वास प्रक्रिया सम्बंधित बीमारियां हुआ करती हैं I
जिन व्यक्तियों का जन्म 15 सितम्बर से 14 अक्टूबर के बीच हो, उन्हें इस अंक के प्रभाव से हृदय रोग, मोतीझारा, वीर्य- रोग, मिर्गी, नासिका रोग, तीव्र ज्वर, पागलपन, खाज- खुजली, लकवा, हड्डियों की चोट, पावों की सूजन, मूर्च्छा आना, नासूर, हैजा, मन्दाग्नि, गले के रोग तथा त्वचा सम्बंधित बीमारियां हुआ करती हैं I

उपयोगी सब्जी, फल एवं जड़ी- बूटियाँ  अंक 5 वाले व्यक्तियों के लिए फलों में सेब, शहतूत, केला, चीकू, अनार, अन्नानास और अंगूर उपयोगी रहते हैं I सब्जियों में चुकंदर, पुदीना, गाजर, मूलीसवा, पालक, भिण्डी, बैंगन व करेले उपयोगी रहते हैं I जड़ी- बूटियों में तुलसी के बीज, यष्टीमधु, पहाड़ी बादाम, अंजीर, छुआरे, केसर एवं अखरोट लाभदायक रहते हैं I
व्यायाम  5 अंक वाले व्यक्तियों के लिए शवासन ठीक रहता है I नजला- जुकाम होने पर जलनेति, सूत्रनेति आदि हठयोग की क्रियायें करनी चाहिए I नियमित शवासन करना अति उत्तम है I
व्रत  इन लोगों को पूर्णिमा का व्रत करना चाहिए I इसके साथ ही सत्यनारायण की कथा भी करनी चाहिए अथवा करवानी चाहिए I
उपासना  आप शनिवार के दिन शनिदेव की उपासना करें I तेल, कपडा, काले तिल का दान करें I शनि की साढ़ेसाती एवं ढैय्या का उपचार करें I
आपका कैरियर  मूलांक 5 एक विचार प्रधान अंक है जिसके धनी नई से नई युक्तियाँ, नए से नए विचार एवं सर्वथा नूतन तर्कों से अनुप्राणित रहते हैं I ऐसे व्यक्ति पूर्णत: क्रियाशील होते हैं I वे झुकते नहीं, झुकाने में विश्वास रखते हैं I इनके जीवन का सबसे बड़ा गुण है, दूसरों को सम्मोहित करने की कला I कुछ ही क्षणों की बातचीत में ये दूसरों को अपना बना लेते हैं, यही नहीं उसे अपना स्थायी मित्र भी बना लेते हैं I जिनका मूल अंक 5 हो वे व्यक्ति निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं :-
 इंजीनियर, सेल्समैन, रोकड़ व बहीखाते का काम, वकालत, रेलवे, टेलीग्राफी, पत्रकारिता, तम्बाकू, दलाली, बीमा, लेखन, संपादन, ट्रांसपोर्ट, राजनीति से सम्बंधित कार्य कर सकते हैं I इसके अतिरिक्त त्वचा रोग, नाक- कान- गला, श्वास सम्बन्धी रोगों के विशेषज्ञ एवं चिकित्सा से सम्बंधित कार्य भी कर सकते हैं I

आपका जीवनसाथी  इस अंक वाले व्यक्ति को उन लोगों के साथ विवाह अथवा मैत्री सम्बन्ध स्थापित करना उत्तम रहता है जिनका जन्म 15 अगस्त से 14 सितम्बर के बीच, 15 मार्च से 14 अप्रैल के बीच, तथा 15 जनवरी से 14 फरवरी के बीच हुआ हो I इसके अतिरिक्त अंक 5 वाले उन लोगों के साथ भी अपना सम्बन्ध स्थापित कर सकते हैं जिनका मूल अंक 1,7 या 8 आता हो उनको भी आप अपना जीवनसाथी बना सकते हैं I
शुभ रंग, रत्न एवं धातु  
                           
अनुकूल रंग : आपके लिए भूरा, सफ़ेद रंग, हल्का खाकी रंग, चमकीला उज्जवल रंग, हल्का रंग खूब शुभत्व प्रदान करता है I अतः घर की दीवारों, फर्नीचर, परदे, बैडशीट, तकिये के गिलाफ, रुमाल आदि इसी रंग के रखें I हरा रंग भी आपके लिए उपयोगी है I अंगूरी रंग के कपडे, जुराबें, रुमाल आदि उपयोग में ला सकते हैं I आप अपने घर में हरे- भरे पौधे भी लगा सकते हैं I गमले भी हरे रंग के लगा सकते हैं I
                              
रत्न एवं धातु इस अंक वाले व्यक्तियों हेतू "पन्ना" सर्वश्रेष्ठ रत्न है I आपको 5 रत्ती का शुद्ध, चमकदार, पारदर्शी,  कान्तियुक्त, निर्दोष "पन्ना" सोने की अंगूठी में धारण करना चाहिए I आप चाहें तो प्लेटिनम में भी जड़वा सकते हैं I अंगूठी में "पन्ना" इस तरह जड़ा हो की पहनने पर वह आपकी त्वचा को स्पर्श करे I इस बात का भी ध्यान रखें की पन्ना प्राण प्रतिष्ठायुक्त हो I इसे बुधवार के दिन धारण करें I
अंक 5 के लिए यंत्र, मन्त्र एवं देवता  जिन व्यक्तियों का जन्म 15 जून  से 14 जुलाई के बीच हुआ हो अथवा 15 सितम्बर से 14 अक्टूबर के बीच हुआ हो अथवा जन्म तिथि या नाम के वर्णों का मूल अंक 5 हो, उन पर "बुध" ग्रह का विशेष प्रभाव रहता है I अतः ऐसे व्यक्तियों को बुध ग्रह का यंत्र धारण करना चाहिए I इस यंत्र को पीतल की अंगूठी पर खुदवाकर कनिष्ठा या मध्यम अंगुली  में धारण करना चाहिए I पीतल के पत्र पर यह यंत्र खुदवाकर दाहिनी भुजा में ताबीज की तरह भी धारण किया जा सकता है I आप चाहें तो इस यंत्र को भोजपत्र पर केसर अथवा कुमकुम की स्याही से अनार की कलम से लिखकर, मन्त्र आदि पढ़कर यंत्र को सिद्ध कर पीतल या चांदी के ताबीज में बंद कर, दायें हाथ के बाजू में धारण कर सकते है I यंत्र को धारण करने से पहले निम्न मन्त्र की 11 माला जपकर यंत्र को सिद्ध अवश्य कर ले I  अंक अनुसार आपके शुभ देवता हैं "लक्ष्मीनारायण" अतः भगवान लक्ष्मीनारायण का स्मरण अवश्य करें I
 

मन्त्र :- ॐ बुं बुधाय नमः I

मूलांक - 6 (जन्म दिनांक - 6,15,24)
दीर्घायु, स्वस्थ, सबल, हसंमुख एवं दूसरों को सम्मोहित करने का गुण जितना मूलांक 6 में है, उतना अन्य किसी भी मूलांक में नहीं है I कलाकार का हृदय एवं सौन्दर्यवृत्ति इनमें जन्मजात होती है, अधिक से अधिक सुन्दर बने रहना इनका स्वभाव होता है I  पूर्णत: भौतिक सुखों में आस्था रखते हुए ये जीवन का सही आनंद उठाते हैं I धन का अभाव रहते हुए भी हृदय से उदार एवं नीतिज्ञ होते हैं I
दूसरों की प्रगति इन्हें सहन नहीं होती I यह स्पर्धा कभी- कभी तो हठ का रूप धारण कर लेती है जिससे इन्हें नुकसान भी उठाना पड़ता है I दूसरों को प्रभावित करने की इनमें अदभुत क्षमता होती है तथा दूसरों से ये बातें इस ढंग से करते हैं की सामने वाला "हाँ" भर ही लेता है I इनका सुडौल और आकर्षक शरीर, नम्रवाणी, मोहक व्यक्तित्व तथा चेहरे की सौम्यता इनकी सफलता में विशेष सहायक होती है I

शुभ वर्ष  यदि आपका मूलांक 6 है तो आपके जीवन में निम्नलिखित वर्ष बहुत ही महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे I 3, 6, 9, 12, 15, 18, 21, 24, 27, 30, 33, 36, 42, 45, 48, 54, 57, 60, 63, 66, 69, 72, 75 और 78वां वर्ष I
इसके अतिरिक्त आपके जीवन में कुछ शुभ वर्ष भी होते हैं जिनमें आपको विशेष लाभ प्राप्त होते हैं और सफलता की सीढियाँ चढ़ते हैं I  आपके जीवन में शुभ वर्ष - 6, 15, 24, 33, 42, 51, 60 तथा 69वां वर्ष है I

शुभ तिथि  6 अंक वाले व्यक्तियों के लिए 6, 15, 24 तिथि शुभ होती है I अतः किसी भी काम में सफलता प्राप्त करनें के लिए आपको मुख्य रूप से इन्हीं तिथियों का उपयोग करना चाहिए I  इस अंक वाले व्यक्ति यदि 20 अप्रैल से 24 मई तथा 21 सितम्बर से 24 अक्टूबर के बीच उक्त शुभ तिथियों में कोई कार्य आरम्भ करें तो इन्हें विशेष सफलता प्राप्त होती है I  6 के अंक की अंक 3 तथा 9 के साथ भी सहानुभूति होती है अतः इनसे संबंधित तिथियां भी शुभ रहती हैं I
आपके शुभ दिन  6 अंक वाले व्यक्तियों के लिए मंगलवार, बृहस्पतिवार एवं शुक्रवार शुभ दिन होते हैं I यदि उक्त शुभ तिथियों में विशेषकर 6, 15, 24 तारीख को शुक्रवार का दिन पड़े तो बहुत शुभ होता है I इसके अतिरिक्त मंगलवार एवं बृहस्पतिवार का दिन भी विशेष शुभ होता है I
आपका स्वास्थ्य    जिनका मूल अंक 6 होता है वे अधिकतर फैफड़ों के रोग से ग्रसित रहते हैं I इन्हें तपेदिक होने का भी भय बना रहता है I मूलत: यह अंक कामवासना प्रधान है, अतः जिन लोगों का मूल अंक 6 हो उन्हें इस प्रकार के रोग होने की सम्भावना बनी रहती है I
जिन व्यक्तियों का जन्म 15 मई से 14 जून के बीच हुआ हो, उन्हें इस अंक के प्रभाव से चेहरा, नाक, आँख, जीभ, दांत, कान, अंगुली, नाख़ून, हड्डी, मांस तथा वीर्य संबंधित बीमारियां हुआ करती है I
जिन व्यक्तियों का जन्म 15 अक्टूबर से 14 नवम्बर के बीच हुआ हो, उन्हें वीर्य दोष, मासिक धर्म संबंधित रोग, चेहरे के रोग, मूर्च्छा आना, अजीर्ण, नपुंसकता, जलोदर, ज्वर, गुर्दे तथा ग्रंथियों से संबंधित रोग हुआ करते हैं I

उपयोगी सब्जी, फल एवं जड़ी- बूटियाँ  अंक 6 वाले व्यक्तियों के लिए फलों में तरबूज, खरबूज, आम, सेब, शहतूत, नाशपती, अनार उपयोगी रहते हैं I सब्जियों में चुकंदर, गाजर, पालक, फूलगोभी एवं सभी प्रकार की फलियाँ उपयोगी रहती हैं I जड़ी- बूटियों में बाबची, इमली का काढ़ा, खुबानी, अंजीर, अखरोट, गुलकंद, कस्तूरी, बनफशा आदि लाभदायक रहते हैं I
व्यायाम  इन लोगों को प्राय: स्वच्छ शुद्ध वायु में दीर्घ श्वास लेना चाहिए I यदि ये प्राणायाम की सरल प्रक्रिया सीख ले तो इनका स्वास्थ्य सदैव ठीक रहेगा I  आप चाहें तो प्राणायाम के साथ ही शलभासन भी करें यह आपके लिए अच्छा रहेगा I
व्रत  जिनका मूल अंक 6 हो उन्हें शुक्रवार का व्रत रखना चाहिए I महिलाओं को संतोषी माता का व्रत करना चाहिए I
उपासना  इनका प्रधान देवता कार्तवीर्यार्जुन है I इस मूल अंक वालों को इसी देवता की पूजा- उपासना करनी चाहिए I
आपका कैरियर  दीर्घायु, स्वस्थ, सबल, हसंमुख एवं दूसरों को सम्मोहित करने का गुण जितना मूलांक 6 में है, उतना अन्य किसी भी मूलांक में नहीं है I कलाकार का हृदय एवं सौन्दर्यवृत्ति इनमें जन्मजात होती है, अधिक से अधिक सुन्दर बने रहना इनका स्वभाव होता है I  पूर्णत: भौतिक सुखों में आस्था रखते हुए ये जीवन का सही आनंद उठाते हैं I धन का अभाव रहते हुए भी हृदय से उदार एवं नीतिज्ञ होते हैं I जिनका मूल अंक 6 हो वे व्यक्ति निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं :-
 वास्तुकला, इंजीनियरिंग, जवाहरात, आभूषण, विदेशी मुद्रा, किसी भी प्रकार के खाद्यानों या खाद्य वस्तुओं से संबंधित, होटल, उपन्यास, कथा- कहानी लेखन, पुस्तक- प्रकाशन, संगीत, चित्रकला, नृत्य, तथा अन्य कलाओं से संबंधित कार्य कर सकते हैं I

आपका जीवनसाथी   इस अंक वाले व्यक्ति को उन लोगों के साथ विवाह अथवा मैत्री सम्बन्ध स्थापित करना उत्तम रहता है जिनका जन्म 15 फरवरी से 14 मार्च के बीच, 15 अप्रैल से 14 मई के बीच, 15 मई से 14 जून के बीच तथा 15 अक्टूबर से 14 नवम्बर के बीच तथा 15 नवम्बर से 14 दिसम्बर के बीच हुआ हो I इसके अतिरिक्त अंक 6 वाले उन लोगों के साथ भी अपना सम्बन्ध स्थापित कर सकते हैं जिनका मूल अंक 2,4,6 या 9 आता हो I जिनके नाम का संक्षिप्त अंक 2,4,6 या 9 आता हो उनको भी आप अपना जीवनसाथी बना सकते हैं I
शुभ रंग, रत्न एवं धातु  
                           
अनुकूल रंग : इस अंक वाले व्यक्तियों के लिए सभी प्रकार के हल्के नीले रंग अनुकूल होते हैं I आपके लिए हल्का नीला, गहरा नीला, आसमानी, गुलाबी रंग व चाकलेटी रंग आपके लिए सौभाग्यवर्द्धक है I काला व लाल रंग आपको शुभत्व नहीं देता, अतः इन्हें उपयोग में नहीं लाना चाहिए I आप घर के सामान, फर्नीचर, चादर, परदे, तकिये के गिलाफ, कुशन कवर, रुमाल आदि इसी रंग के रखें I
                              
रत्न एवं धातु : इस अंक वाले व्यक्तियों के लिए उपयुक्त रत्न "हीरा" है I आप शुक्र रत्न "हीरा" तीन से चार रत्ती का धारण करें I हीरा शुद्ध एवं सौम्य होना चाहिए, यह भी ध्यान रखें की हीरा निर्दोष हो, दोषजनित हीरा आपको मुश्किलों में डाल सकता है I हीरे को चांदी की अंगूठी में धारण करें I आपके लिए उपयुक्त धातु चांदी एवं  प्लेटिनम है, आप चाहें तो प्लेटिनम का उपयोग भी कर सकते हैं I अंगूठी में हीरा इस तरह जड़ा हो की पहनने पर वह आपकी त्वचा को स्पर्श करे I इस बात का भी ध्यान रखें की हीरा प्राण प्रतिष्ठायुक्त हो I इसे शुक्रवार के दिन धारण करें I
अंक 6 के लिए यंत्र, मन्त्र एवं देवता  जिन व्यक्तियों का जन्म 15 मई से 14 जून के बीच तथा 15 अक्टूबर से 14 नवम्बर के बीच हुआ हो अथवा जन्म तिथि या नाम के वर्णों का मूल अंक 6 हो, उन पर "शुक्र" ग्रह का विशेष प्रभाव रहता है I अतः ऐसे व्यक्तियों को शुक्र ग्रह का यंत्र धारण करना चाहिए I इस यंत्र को चांदी की अंगूठी पर खुदवाकर अनामिका अंगुली  में धारण किया जा सकता है अथवा चांदी के पत्र पर यह यंत्र खुदवाकर दाहिनी भुजा में ताबीज की तरह भी धारण किया जा सकता है I आप चाहें तो इस यंत्र को भोजपत्र पर केसर अथवा कुमकुम की स्याही से अनार की कलम से लिखकर, मन्त्र आदि पढ़कर यंत्र को सिद्ध कर चांदी के ताबीज में बंद कर, दायें हाथ के बाजू में धारण कर सकते है I यंत्र को धारण करने से पहले निम्न मन्त्र की 11 माला जपकर यंत्र को सिद्ध अवश्य कर ले I  अंक अनुसार आपके शुभ देवता हैं "किर्ताजुन" अतः भगवान किर्ताजुन का स्मरण अवश्य करें I
 

मन्त्र :- ॐ शुं शुक्राय नमः I

मूलांक - 7 (जन्म दिनांक - 7,16,25)
मूलांक 7 सहृदय, सहिष्णु एवं सहयोगी भावना का प्रतीक है I आप में मूलत: तीन विशिष्ट गुण हैं I पहला गुण है- मौलिकता, दूसरा- स्वतंत्र विचार शक्ति और तीसरा- विशाल व्यक्तित्व I जिन वस्तुओं को लोग व्यर्थ और बेकार समझते हैं, उनमें भी कुछ उपयोगिता आप ढूंढ़ ही निकालेंगे I आप प्रति क्षण कुछ न कुछ स्सोचते ही रहते हैं I आपका मस्तिष्क खली या निष्क्रिय नहीं रह सकता और वह सोचना कुछ न कुछ सार रखता है I आप किसी भी स्वतंत्रता का हनन नहीं देख सकते I आपका परिचय क्षेत्र विस्तृत होगा I आपके ऊँचे और बड़े लोगों से भी मधुर सम्बन्ध होंगें I समाज में आपको आदरणीय स्थान प्राप्त होगा I आपकी अदभुत प्रतिभा ही आपको उच्च स्थान पर आसीन करनें में सहायक होगी I मित्रों से आपको भरपूर सहयोग मिलेगा I साहसिक कार्यों में आपकी रूचि बराबर बनी रहेगी तथा कुछ ऐसा कर गुजरने को आतुर होंगे जो आपको चमका दे, ऊँचा उठा दे, प्रसिद्धि दिला दे I

शुभ वर्ष  यदि आपका मूलांक 7 है तो आपके जीवन में निम्नलिखित वर्ष बहुत ही महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे I 1, 2, 4, 7, 10, 11, 13, 16, 19, 20, 22, 25, 28, 29, 31, 34, 38, 40, 43, 46, 47, 49, 52, 55, 56, 58, 61, 64, 65, 70, 73, 76 और 79वां वर्ष I
इसके अतिरिक्त आपके जीवन में कुछ शुभ वर्ष भी होते हैं जिनमें आपको विशेष लाभ प्राप्त होते हैं और सफलता की सीढियाँ चढ़ते हैं I  आपके जीवन में शुभ वर्ष - 7, 16, 25, 34, 43, 52, 61 तथा 79वां वर्ष है I

शुभ तिथि  7 अंक वाले व्यक्तियों के लिए 7, 16, 25 तिथि शुभ होती है I अतः किसी भी काम में सफलता प्राप्त करनें के लिए आपको मुख्य रूप से इन्हीं तिथियों का उपयोग करना चाहिए I  इस अंक वाले व्यक्ति यदि 21 जून से 25 जुलाई के बीच उक्त शुभ तिथियों में कोई कार्य आरम्भ करें तो इन्हें विशेष सफलता प्राप्त होती है I 7 के अंक की अंक 2 से सहानुभूति होती है अतः मूलांक 2 वाली तिथियां शुभ फल प्रदान करने वाली होगी I
आपके शुभ दिन  7 अंक वाले व्यक्तियों के लिए सोमवार एवं रविवार शुभ दिन होते हैं I यदि उक्त शुभ तिथियों में विशेषकर 7, 16, 25 तारीख को सोमवार का दिन हो तो बहुत शुभ होता है I इसके अतिरिक्त रविवार का दिन भी विशेष शुभ होता है I
आपका स्वास्थ्य  जिनका मूल अंक 7 होता है उन्हें प्राय: चर्मरोग घेरे रहते हैं I खुजली अथवा दाद होने की भी सम्भावना बनी रहती है ई चर्म सम्बन्धी शिकायत होती ही रहती है I इस अंक से प्रभावित व्यक्तियों को आँख, उदर तथा फेफड़ों से संबंधित बीमारियां, गुप्त तथा कठिन रोग एवं फोड़े- फुंसी आदि की शिकायत रहती हैं I
किसी भी महीने की दिनांक 7,16 एवं 25 को पैदा हुए व्यक्तियों को तनाव अधिक रहता है, वे सदैव किसी चिंता में खोये रहते हैं I इन्हें बदहजमी एवं कब्ज की शिकायत भी रहती है I नींद भी कम ही आती है I

उपयोगी सब्जी, फल एवं जड़ी- बूटियाँ  अंक 7 वाले व्यक्तियों के लिए फलों में सेब, अंगूर एवं सभी फलों के रस उपयोगी रहते हैं I सब्जियों में सलाद, चुकंदर, ककड़ी, प्याज, मुली, गाजर, टमाटर एवं पालक उपयोगी रहती हैं I जड़ी- बूटियों में बाबची, इमली का काढ़ा, , सौंफ एवं ठंडी तासीर वाली जड़ी- बूटियाँ उपयोगी रहती हैं I
व्यायाम चर्म रोग से बचने के लिए इन्हें हठयोग की शंख- प्रक्षालन विधि का अभ्यास करना चाहिए और यदा- कदा इसकी प्रक्रिया करते रहना चाहिए I सूर्य नमस्कार करने पर भी आपको चर्मरोगों से रहत मिलेगी I
व्रत  इन लोगों को मंगलवार का व्रत रखना चाहिए और हनुमान जी के दर्शन करने चाहिए I
उपासना  इन्हें नरसिंह देवता की उपासना करनी चाहिए I इनकी उपासना से निश्चय ही इस मूल अंक वालों के सभी कष्ट दूर होंगें और धन- धान्य की वृद्धि होगी I
आपका कैरियर  मूलांक 7 सहृदय, सहिष्णु एवं सहयोगी भावना का प्रतीक है I आप में मूलत: तीन विशिष्ट गुण हैं I पहला गुण है- मौलिकता, दूसरा- स्वतंत्र विचार शक्ति और तीसरा- विशाल व्यक्तित्व I जिन वस्तुओं को लोग व्यर्थ और बेकार समझते हैं, उनमें भी कुछ उपयोगिता आप ढूंढ़ ही निकालेंगे I आप प्रति क्षण कुछ न कुछ स्सोचते ही रहते हैं I आपका मस्तिष्क खली या निष्क्रिय नहीं रह सकता और वह सोचना कुछ न कुछ सार रखता है I जिनका मूल अंक 7 हो वे व्यक्ति निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं :-
फिल्म व्यवसाय, यात्रा, हवाई यात्राओं से संबंधित कार्य, डेरी फार्मिंग, ड्राइविंग, दवाई-विक्रेता, गुप्तचरी से संबंधित सेवाएं, तरल पदार्थों की बिक्री, पहलवानी और रबड़ आदि से संबंधित कार्य कर सकते हैं I इसके अतिरिक्त लेखन, संपादन एवं पत्रकारिता से संबंधित कार्य, राजनीति से संबंधित कार्य भी कर सकते हैं I

आपका जीवनसाथी  इस अंक वाले व्यक्ति को उन लोगों के साथ विवाह अथवा मैत्री सम्बन्ध स्थापित करना उत्तम रहता है जिनका जन्म 15 दिसम्बर से 14 जनवरी के बीच, 15 जून से 14 जुलाई के बीच, 15 सितम्बर से 14 अक्टूबर के बीच तथा 15 जनवरी से 14 फरवरी के बीच हुआ हो I इसके अतिरिक्त अंक 7 वाले उन लोगों के साथ भी अपना सम्बन्ध स्थापित कर सकते हैं जिनका मूल अंक 3,5 या 8 आता हो I जिनके नाम का संक्षिप्त अंक 3,5 या 8 आता हो उनको भी आप अपना जीवनसाथी बना सकते हैं I
शुभ रंग, रत्न एवं धातु   
                            अनुकूल रंग :
इस अंक वाले व्यक्तियों के लिए सफ़ेद, हल्का हरा और हल्का पीला, कपूरी सफ़ेद, हल्का लाल एवं हल्का भूरा रंग अनुकूल और शुभ है I हल्का नीला रंग आपके लिए उन्नति प्रदान करने वाला है I इन्हीं रंगों से घर की सजावट करें, घर की दीवारें, खिड़कियाँ, रैलिंग, दरवाजे, पर्दे, सोफे, बैडशीट आदि उपरोक्त रंगों की हो तो आपके लिए उचित एवं लाभदायक रहेगा I ये रंग आपके व्यक्तित्व को निखारने में भी सहायक होंगे I
                            
रत्न एवं धातु :: इस अंक वाले व्यक्तियों के लिए उपयुक्त रत्न है "लहसुनिया" I आपको शुद्ध, पारदर्शी, चमकदार, कान्तियुक्त एवं निर्दोष लहसुनिया रत्न धारण करना चाहिए I कम से कम 6 रत्ती का लहसुनिया रत्न धारण करना चाहिए जो स्वर्ण अंगूठी में हो I आपके लिए शुभ धातु सोना है अतः इसमें अंगूठी इस प्रकार जड़वाएं की पहनने पर वह आपकी त्वचा को स्पर्श करे I यह अंगूठी अपने हाथ की कनिष्ठा अंगुली में धारण करें I आप हीरा भी धारण कर सकते हैं I
अंक 7 के लिए यंत्र, मन्त्र एवं देवता जिन व्यक्तियों का जन्म 15 मार्च से 14 अप्रैल के बीच हुआ हो अथवा उनकी जन्म तिथि या नाम के वर्णों का मूल अंक 7 हो, उन पर "नेपच्यून" ग्रह का विशेष प्रभाव रहता है I इस अंक को बृहस्पति अथवा केतु से भी प्रभावित माना जाता है I अतः ऐसे व्यक्तियों को केतु ग्रह का यंत्र धारण करना चाहिए I इस यंत्र को सोने की अंगूठी पर खुदवाकर मध्यमा या तर्जनी अंगुली  में धारण करना चाहिए I सोने के पत्र पर यह यंत्र खुदवाकर दाहिनी भुजा में ताबीज की तरह बांधना चाहिए I आप चाहें तो इस यंत्र को भोजपत्र पर केसर अथवा कुमकुम की स्याही से अनार की कलम से लिखकर, मन्त्र आदि पढ़कर यंत्र को सिद्ध कर सोने के ताबीज में बंद कर, दायें हाथ के बाजू में धारण कर सकते है I यंत्र को धारण करने से पहले निम्न मन्त्र की 11 माला जपकर यंत्र को सिद्ध अवश्य कर ले I  अंक अनुसार आपके शुभ देवता हैं "नरसिंह भगवान" अतः भगवान नरसिंह का स्मरण अवश्य करें I
 

मन्त्र :- ॐ कें केतवेनमः I

मूलांक - 8 (जन्म दिनांक - 8,17,26)
अंक ज्योतिष में मूलांक 8 को 'विश्वास का अंक' कहा गया है जिसका स्वामी शनि है आपका स्वभाव सहयोगी है, जब तक आप किसी के मित्र और सहयोगी हैं, प्रत्येक रूप से आप उसे सहायता पहुंचाते रहते हैं, उसके जीवन की ढाल बनकर रहते हैं और विशाल वट वृक्ष की तरह अपनी शीतल छाया से उसे सुख पहुंचाते रहते हैं, परन्तु जब आप किसी पर क्रोधित हो जाते हैं या कीसी से शत्रुता कर लेते हैं, तब आपका रूप प्रचंड हो जाता है और सभी प्रकार से आप उसे नष्ट करने पर तुल जाते हैं I मन में इस प्रकार गांठ बांध लेते हैं की सभी प्रकार से उसे परास्त करके ही दम लेते हैं I
यह आपका सबल- सजग व्यक्तित्व है की बहुत से उतार- चढाव देखने के बाद भी आप टूटते नहीं है I आपका व्यक्तित्व सही शब्दों में लचीला है जो परिस्थिति के अनुसार अपने आपको ढाल लेने की क्षमता रखता है I
आप सेवाभावी हैं I आपके मन में करुणा है और विचारों में शांति का संदेश I दूसरे लोगों को यथासंभव प्रसन्न बनाये रखना या दूसरों की सेवा करते रहना आपका लक्ष्य होगा I
यह आपका स्वभाव ही है कि जिस किसी भी कार्य में आप लग जाते हैं, उस पर जमकर काम करते हैं और अंतत: आप उसमें सफल भी हो जाते हैं I

शुभ वर्ष  यदि आपका मूलांक 8 है तो आपके जीवन में निम्नलिखित वर्ष बहुत ही महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे I 4, 8, 13, 17, 22, 26, 31, 35, 40, 44, 49, 53, 58, 62, 67, 71, 76 और 80वां वर्ष I
इसके अतिरिक्त आपके जीवन में कुछ शुभ वर्ष भी होते हैं जिनमें आपको विशेष लाभ प्राप्त होते हैं और सफलता की सीढियाँ चढ़ते हैं I  आपके जीवन में शुभ वर्ष - 8, 17, 26, 35, 44, 53, 62 तथा 71वां वर्ष है I

शुभ तिथि  8 अंक वाले व्यक्तियों के लिए 8, 17, 26 तिथि शुभ होती है I अतः किसी भी काम में सफलता प्राप्त करनें के लिए आपको मुख्य रूप से इन्हीं तिथियों का उपयोग करना चाहिए I  इस अंक वाले व्यक्ति यदि 21 दिसम्बर से 19 फरवरी के बीच उक्त शुभ तिथियों में कोई कार्य आरम्भ करें तो इन्हें विशेष सफलता प्राप्त होती है I 8 के अंक की अंक 4 से सहानुभूति होती है अतः इससे संबंधित तिथियां भी शुभ रहती है I
आपके शुभ दिन  8 अंक वाले व्यक्तियों के लिए शनिवार, रविवार एवं सोमवार शुभ दिन होते हैं I यदि उक्त शुभ तिथियों में विशेषकर 8, 17, 26 तारीख को शनिवार का दिन हो तो बहुत शुभ होता है I इसके अतिरिक्त रविवार एवं सोमवार का दिन भी अच्छा होता है I
आपका स्वास्थ्य  जिनका मूल अंक 8 होता है उन्हें जिगर से संबंधित रोग लगे ही रहते हैं I इस अंक से प्रभावित व्यक्तियों के लीवर कमजोर होने की वजह से अन्य अनेक बीमारियां आकर घेर लेती है I जहाँ तक हो सके व्यसनों से दूर रहना चाहिए I किसी भी प्रकार का नशा न करें I
इस अंक से प्रभावित व्यक्तियों को दुर्बलता, नपुंसकता, पेट दर्द, दांत रोग, त्वचा रोग, पांव तथा घुटनों से संबंधित बीमारियां, अंधापन, बहरापन, गठिया, लकवा, जोड़ों में दर्द तथा घाव आदि की शिकायतें भी होती हैं I इस अंक से प्रभावित स्त्रियों को मासिक धर्म संबंधित विभिन्न बीमारियां हो जाती है I
किसी भी महीने की दिनांक 8, 17, 26 को पैदा हुए व्यक्तियों को जिगर, पित्ताशय, आँतों तथा मल विसर्जन से संबंधित रोग भी रहते हैं I बवासीर रोग भी पीड़ित करता है I

उपयोगी सब्जी, फल एवं जड़ी- बूटियाँ  अंक 8 वाले व्यक्तियों के लिए फलों में संतरा, पपीता, अन्नानास, नीम्बू, अमरुद  एवं अनार उपयोगी रहते हैं I सब्जियों में चुकंदर, ककड़ी, खीरा, गाजर, टमाटर, फलियां एवं पालक उपयोगी रहता हैं I जड़ी- बूटियों में बैरी के पत्ते, सना के पत्ते, ईसबगोल, बाबची, सौंफ एवं अजवायन उपयोगी रहती है I
व्यायाम   इसके लिए सूर्यनमस्कार, भुजंगासन, धनुरासन,हलासन और शीर्षासन बहुत उपर्युक्त है I इन आसनों की विशेषता यह है की इनसे जहाँ जिगर से संबंधित बीमारियां दूर होगी, वहां शरीर भी सुदृढ़ होगा I
व्रत  इन लोगों को शनिवार का व्रत करना चाहिए I भोजन एक समय ही करें और उसमें नमक एवं खटाई ग्रहण नहीं करें I
उपासना  आप शनिवार के दिन शनिदेव की उपासना करें I तेल, कपड़ा तथा काले तिल का दान करें I शनि की साढ़ेसाती एवं ढैय्या का उपचार करें I
आपका कैरियर  मूलांक 8 को 'विश्वास का अंक' कहा गया है जिसका स्वामी शनि है आपका स्वभाव सहयोगी है, जब तक आप किसी के मित्र और सहयोगी हैं, प्रत्येक रूप से आप उसे सहायता पहुंचाते रहते हैं, उसके जीवन की ढाल बनकर रहते हैं और विशाल वट वृक्ष की तरह अपनी शीतल छाया से उसे सुख पहुंचाते रहते हैं, परन्तु जब आप किसी पर क्रोधित हो जाते हैं या कीसी से शत्रुता कर लेते हैं, तब आपका रूप प्रचंड हो जाता है और सभी प्रकार से आप उसे नष्ट करने पर तुल जाते हैं I मन में इस प्रकार गांठ बांध लेते हैं की सभी प्रकार से उसे परास्त करके ही दम लेते हैं I जिनका मूल अंक 8 हो वे व्यक्ति निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं :-
इंजीनियर, खिलाडी, नगर पालिकाओं आदि में उच्च अधिकारी होते हैं I इनके लिए ठेकेदारी, वकालत, गार्डनिंग, कोयला, खान, मुर्गीपालन आदि कार्य उचित रहते हैं I इसके अतिरिक्त लोहा, कोयला और लकड़ी से संबंधित व्यवसाय, पुलिस विभाग एवं जेल विभाग से संबंधित नौकरी, विभिन्न प्रकार की ठेकेदारी भी कर सकते हैं I

आपका जीवनसाथी   इस अंक वाले व्यक्ति को उन लोगों के साथ विवाह अथवा मैत्री सम्बन्ध स्थापित करना उत्तम रहता है जिनका जन्म 15 जून से 14 जुलाई के बीच, 15 सितम्बर से 14 अक्टूबर के बीच तथा 15 मार्च से 14 अप्रैल के बीच हुआ हो I इसके अतिरिक्त अंक 8 वाले उन लोगों के साथ भी अपना सम्बन्ध स्थापित कर सकते हैं जिनका मूल अंक 5 अथवा 7 आता हो I जिनके नाम का संक्षिप्त अंक  5 अथवा 7 आता हो उनको भी आप अपना जीवनसाथी बना सकते हैं I
शुभ रंग, रत्न एवं धातु   
                            अनुकूल रंग :
काला रंग आपके अंक अनुसार आपके लिए शुभ है I आप काले रंग का अधिकाधिक उपयोग करें I काली पेंट एवं डार्क कलर का प्रिन्टेड शर्ट पहन सकते हैं I आप काली टाई, काले मौजे, काले जूते उपयोग में ला सकते हैं I अपने घर के दरवाजों एवं रैलिंग में भी काले रंग का अधिक उपयोग कर सकते हैं I काला वाहन खरीद सकते हैं I काले रंग का टी.वी., टेप रिकार्डर, फ्रिज आदि भी आपके घर की शोभा बढ़ाएगा I
                           
रत्न एवं धातु : इस अंक अनुसार आपका शुभ रत्न "नीलम" है I आपको शुद्ध, पारदर्शी, चमकदार, कान्तियुक्त एवं निर्दोष नीलम रत्न 4-5 रत्ती का धारण करना चाहिए I नीलम प्राण- प्रतिष्ठायुक्त ही धारण करें I आपकी शुभ धातु लोहा है अतः आप चाहें तो नीलम लोहा की अंगूठी में जड़वाकर धारण कर सकते हैं I  अंगूठी में नीलम इस प्रकार जड़ा होना चाहिए की पहनने पर वह आपकी त्वचा को स्पर्श करे I
अंक 8 के लिए यंत्र, मन्त्र एवं देवता  जिन व्यक्तियों का जन्म 15 जनवरी से 14 फरवरी के बीच हुआ हो अथवा उनकी जन्म तिथि या नाम के वर्णों का मूल अंक 8 हो, ऐसे जातकों पर "शनि" ग्रह का विशेष रूप से प्रभाव रहता है I अतः ऐसे व्यक्तियों को शनि ग्रह का यंत्र धारण करना चाहिए I इस यंत्र को जस्ते अथवा लोहे की अंगूठी पर खुदवाकर दायें हाथ की मध्यमा अंगुली  में पहनना चाहिए या लोहे के पत्र पर यह यंत्र खुदवाकर किसी भी भुजा में ताबीज की तरह बांधना चाहिए I आप चाहें तो इस यंत्र को भोजपत्र पर केसर अथवा कुमकुम की स्याही से अनार की कलम से लिखकर, मन्त्र आदि पढ़कर यंत्र को सिद्ध कर जस्ते अथवा लोहे के ताबीज में बंद कर, दायें हाथ के बाजू में धारण कर सकते है I यंत्र को धारण करने से पहले निम्न मन्त्र की 11 माला जपकर यंत्र को सिद्ध अवश्य कर ले I  अंक अनुसार आपके शुभ देवता हैं "शनि देव" अतः भगवान शनि का स्मरण अवश्य करें I
 

मन्त्र :- ॐ शं शनैश्चराय नमः I

मूलांक - 9 (जन्म दिनांक - 9,18,27)
मूलांक 9 के व्यक्ति धनी होते हैं, शारीरिक रूप से भी और मानसिक रूप से भी I इनका साहस कभी- कभी इतना बढ़ जाता है की वह दुस्साहस का रूप धारण कर लेता है I ये ही वे वीर होते हैं, जो अपने अदभुत एवं चुनौती भरे कार्यों से नाम अमर कर जाते हैं I यद्यपि ये व्यक्ति ऊपर से प्रचंड, कठोर एवं विस्फोटक होते हैं, परन्तु अन्दर से कोमल होते हैं I अनुशासन को जीवन में सर्वोपरी मानते हैं और जिस किसी भी कार्य के लिए ये स्वीकृति दे देते हैं उसे पूरा करके ही छोड़ते हैं I
इनका प्रधान ग्रह मंगल है जो की युद्ध का देवता है I हारकर, परास्त होकर या नीचा देखकर ये जीने वाले नहीं I धीरे- 2 धुआं छोडती हुई लकड़ी की तरह भभक कर जीना और जलना जानते हैं, क्षण भर के लिए ही सही, पर उस एक क्षण में ही दुनियां को चकाचौंध करने में विश्वास रखते हैं I
गृहस्थ जीवन में न्युनाधिक रूप से विपरीतता बनी रहती है I फलस्वरूप बात-2 में झल्ला उठना, क्रोधित हो जाना आदि भी संभव है, अतः ऐसे व्यक्ति यदि अपने आप पर पूर्ण नियंत्रण रखें, तो निश्चित तौर पर सफल, उन्नत एवं श्रेष्ठ बन सकते हैं I 

शुभ वर्ष  यदि आपका मूलांक 9 है तो आपके जीवन में निम्नलिखित वर्ष बहुत ही महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे I 3, 6, 9, 12, 18, 21, 24, 27, 30, 33, 36, 39, 42, 45, 48, 51, 54, 57, 60, 63, 66, 69, 72, 75 और 78वां वर्ष I
इसके अतिरिक्त आपके जीवन में कुछ शुभ वर्ष भी होते हैं जिनमें आपको विशेष लाभ प्राप्त होते हैं और सफलता की सीढियाँ चढ़ते हैं I  आपके जीवन में शुभ वर्ष - 9, 18, 27, 36, 45, 54, 63 तथा 72वां वर्ष है I

शुभ तिथि  9 अंक वाले व्यक्तियों के लिए 9, 18, 27 तिथि शुभ होती है I अतः किसी भी काम में सफलता प्राप्त करनें के लिए आपको मुख्य रूप से इन्हीं तिथियों का उपयोग करना चाहिए I  इस अंक वाले व्यक्ति यदि 21 मार्च से 27 अप्रैल के बीच तथा 21 अक्टूबर से 27 नवम्बर के बीच उक्त शुभ तिथियों में कोई कार्य आरम्भ करें तो इन्हें विशेष सफलता प्राप्त होती है I 9 के अंक की 3 और 6 अंक  से सहानुभूति होती है अतः इससे संबंधित तिथियां भी शुभ रहती है I
आपके शुभ दिन  9 अंक वाले व्यक्तियों के लिए मंगलवार, बृहस्पतिवार एवं शुक्रवार के दिन शुभ होते हैं I यदि उक्त शुभ तिथियों में विशेषकर 9, 18, 27 तारीख को मंगलवार का दिन हो तो विशेष शुभ दिन होता है I इसके अतिरिक्त बृहस्पतिवार एवं शुक्रवार का दिन भी अच्छा रहता है I
आपका स्वास्थ्य  इस अंक के स्वामी अथवा इस अंक वाले व्यक्ति चर्मरोग तथा नासारन्ध्र से संबंधित जुकाम आदि रोगों से पीड़ित हो सकते हैं I इन्हें चाहिए की उन रोगों से बचें I
जिन व्यक्तियों का जन्म 15 अप्रैल से 14 मई के बीच हुआ हो, उन्हें इस अंक के प्रभाव से शरीर संचालन क्रिया तथा मस्तिष्क संबंधित रोग होते हैं I
जिन व्यक्तियों का जन्म 15 नवम्बर से 14 दिसम्बर के बीच हुआ हो, उन्हें इस अंक के प्रभाव से जननेन्द्रिय संबंधित रोग, मूत्र रोग, रक्त एवं त्वचा रोग, खाज- खुजली, फोड़े- फुन्सी, विष, सूजन, नासूर, अर्श तथा वीर्य संबंधित विकार होते हैं I  

उपयोगी सब्जी, फल एवं जड़ी- बूटियाँ  अंक 9 वाले व्यक्तियों के लिए फलों में संतरा, अमरुद, अंगूर एवं केला उपयोगी रहते हैं I सब्जियों में बालम ककड़ी, खीरा, पालक, दानामैथी के पत्ते, सरसों के पत्ते, फलियाँ एवं आलू उपयोगी रहता हैं I आपको तेज मसलों, प्याज, लहसून, अदरक, तेज मिर्च से परहेज करना चाहिए I जड़ी- बूटियों में रेवन्दचीनी, मजीठ एवं बिच्छूबूटी के रस का सेवन करना चाहिए I
व्यायाम यदि आपको नाक से सम्बंधित बीमारी, जुकाम आदि हो तो इन्हें जलनेति आदि हठयोग की क्रिया करनी चाहिए I यह क्रिया करने से आपकी जुकाम की समस्या हल हो जाएगी, यदि आप यह क्रिया नियमित रूप से करें तो जुकाम सदैव के लिए जाता रहेगा I आपको प्राणायाम का भी अभ्यास करना चाहिए I सूर्य नमस्कार भी करें तो उत्तम रहेगा I
व्रत  इन लोगों को मंगलवार का व्रत करना चाहिए I भोजन करने से पूर्व हनुमान जी के दर्शन करें तो लाभ होगा I हनुमान जी कि पूजा अर्चना करें I
उपासना  इस अंक वाले व्यक्तियों के आराध्य देवता हनुमान जी ही हैं I इन्हें हनुमान जी कि उपासना करनी चाहिए I हनुमान जी कि पूजा- अर्चना करें I हनुमान चालीसा का पाठ आदि करना चाहिए I
आपका कैरियर  मूलांक 9 के व्यक्ति धनी होते हैं, शारीरिक रूप से भी और मानसिक रूप से भी I इनका साहस कभी- कभी इतना बढ़ जाता है की वह दुस्साहस का रूप धारण कर लेता है I ये ही वे वीर होते हैं, जो अपने अदभुत एवं चुनौती भरे कार्यों से नाम अमर कर जाते हैं I यद्यपि ये व्यक्ति ऊपर से प्रचंड, कठोर एवं विस्फोटक होते हैं, परन्तु अन्दर से कोमल होते हैं I अनुशासन को जीवन में सर्वोपरी मानते हैं और जिस किसी भी कार्य के लिए ये स्वीकृति दे देते हैं उसे पूरा करके ही छोड़ते हैं I जिनका मूल अंक 9 हो वे व्यक्ति निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं :-
सेना, पुलिस, कैमिस्ट और मशीनरी आदि से सम्बंधित कार्य करें तो अधिक सफल होंगे I इस अंक वाले व्यक्ति अग्निशमन सेवाओं, वकालत एवं धार्मिक कार्यों में भी सफल हो सकते हैं I ऐसे व्यक्ति इंजीनियरी के विषयों में निपुणता रखते हैं I  इसके अतिरिक्त औषधि निर्माण, बिक्री अथवा इनसे सम्बंधित कार्य भी कर सकते हैं I

आपका जीवनसाथी  इस अंक वाले व्यक्ति को उन लोगों के साथ विवाह अथवा मैत्री सम्बन्ध स्थापित करना उत्तम रहता है जिनका जन्म 15 दिसम्बर से 14 जनवरी के बीच, 15 मई से 14 जून के बीच तथा 15 अक्टूबर से 14 नवम्बर के बीच हुआ हो I इसके अतिरिक्त अंक 9 वाले उन लोगों के साथ भी अपना सम्बन्ध स्थापित कर सकते हैं जिनका मूल अंक 3 अथवा 6 आता हो I जिनके नाम का संक्षिप्त अंक  3 अथवा 6 आता हो उनको भी आप अपना जीवनसाथी बना सकते हैं I
शुभ रंग, रत्न एवं धातु   
                            अनुकूल रंग :
अंक अनुसार आपके लिए शुभ रंग लाल, गुलाबी, मेजेन्टा, हल्का मेहरून, केसरिया, हल्का पीला है I आप उपरोक्त रंगों का अपने जीवन में अधिकाधिक प्रयोग करें I आप इन्हीं रंगों के कपड़े पहन सकते हैं, इन्हीं रंगों का रुमाल रख सकते हैं I टाई बांध सकते हैं I आप अपने घर में भी इन्हीं रंगों का अधिकाधिक प्रयोग करें I जहाँ तक हो सके अपने घर कि साज- सज्जा में लाल रंग का उपयोग अधिक करें I
                           
रत्न एवं धातु : इस अंक अनुसार आपका शुभ रत्न "मूंगा" है I आप चार- पाँच रत्ती का शुद्ध, चमकदार, कान्तियुक्त, सुडौल, निर्दोष एवं प्राण- प्रतिष्ठायुक्त मूंगा धारण करें I मूंगा तेज लाल रंग का हो तो उत्तम रहेगा I आपकी शुभ धातु सोना है अतः आप चाहें तो मूंगा सोने की अंगूठी में जड़वाकर धारण कर सकते हैं I  अंगूठी में मूंगा इस प्रकार जड़ा होना चाहिए की पहनने पर वह आपकी त्वचा को स्पर्श करे I
अंक 9 के लिए यंत्र, मन्त्र एवं देवता  जिन व्यक्तियों का जन्म 15 अप्रैल से 14 मई अथवा 15 नवम्बर से 14 दिसम्बर के बीच हुआ हो अथवा उनकी जन्म तिथि या नाम के वर्णों का मूल अंक 9 हो, ऐसे जातकों पर "मंगल" ग्रह का विशेष रूप से प्रभाव रहता है I अतः ऐसे व्यक्तियों को मंगल ग्रह का यंत्र धारण करना चाहिए I इस यंत्र को तांबे या सोने की अंगूठी पर खुदवाकर दायें हाथ की मध्यमा अंगुली  में पहनना चाहिए अथवा ताम्र या स्वर्ण के पत्र पर यह यंत्र खुदवाकर दायें हाथ की भुजा में ताबीज की तरह बांधना चाहिए I आप चाहें तो इस यंत्र को भोजपत्र पर केसर अथवा कुमकुम की स्याही से अनार की कलम से लिखकर, मन्त्र आदि पढ़कर यंत्र को सिद्ध कर तांबे या सोने के ताबीज में बंद कर, दायें हाथ के बाजू में धारण कर सकते है I यंत्र को धारण करने से पहले निम्न मन्त्र की 11 माला जपकर यंत्र को सिद्ध अवश्य कर ले I  अंक अनुसार आपके शुभ देवता हैं "हनुमान" अतः भगवान हनुमान का स्मरण अवश्य करें I
 

मन्त्र :- ॐ अं अंगारकाय नमः I

A
अंग्रेजी वर्णमाला का यह पहला अक्षर व्यक्ति की श्रेष्ठता का दिग्दर्शक है I जिन व्यक्तियों के नाम का पहला अक्षर 'ए' होता है, वे निश्चय ही श्रेष्ठ एवं सदगुण विचारों से सम्पन्न होते हैं I उन पर भावनाओं का गहरा नियंत्रण रहता है कि उन्हें भावुक व्यक्ति की संज्ञा दी जा सकती है I
उनके विचार रचनात्मक होते हैं I वे दूसरों के सुख-दुःख में भागीदार रहते हैं तथा अपने आप में खोये हुए से ऐसे व्यक्ति विश्व को सुंदर, मधुर एवं प्रेममय बनाने को उत्सुक रहते हैं I
B
अंग्रेजी वर्णमाला का यह दूसरा अक्षर अन्तर्मुखी है I ऐसे व्यक्ति विचारों को अपने भीतर ही संजोये रहते हैं तथा वाद- विवाद में बहुत कम हिस्सा लेते हैं I ये स्वयं के विचारों, भावनाओं एवं कार्यों में ही लीन रहते हैं I 
इनकी जान- पहचान तथा मित्रों का एक सीमित क्षेत्र होता है तथा उनमें से भी बहुत ही कम पर ये विश्वास करते हैं I 
ये जीवन में शंकालु तथा चौकन्ने रहते हैं तथा अपने स्वार्थों पर पैनी दृष्टि रखते हैं I ऐसे व्यक्ति अन्य लोगों व अधिकारियों से तथा अपरिचितों से मिलने में कतराते हैं I इनमें एक प्रकार की झिझक या आत्महीनता की भावना होती है, जो इन्हें खुलने नहीं देती I
C
अंग्रेजी वर्णमाला का यह तीसरा अक्षर पूर्णरूपेण 'मूडी' होता है I जो धुन जच गई, उसे पूरा करके ही छोड़ेंगे I फिर चाहे कितना ही समय लग जाए और व्यय हो जाए I एक बार जो कह दिया, वह पत्थर की लकीर और जच गया वह होगा ही, इसमें कोइ शक नहीं रहता I 
ऐसे व्यक्ति का मस्तिष्क निरन्तर क्रियाशील रहता है और वह कुछ न कुछ योजना बनाते ही रहते हैं I ऐसे व्यक्ति निस्संदेह दूरदर्शी होते हैं और जो धारणा बनाते हैं, वह भविष्य में सोलह आने सही उतरती है I
D
अंग्रेजी वर्णमाला का यह चौथा अक्षर पूर्ण आत्मविश्वास एवं आत्मनियंत्रण का परिचायक है I ऐसे व्यक्ति जिस कार्य में भी हाथ डालते हैं, उसे सफल और सम्पन्न करके ही छोड़ते हैं I विपरीत परिस्थितियों एवं बाधाओं के आ जाने पर भी ये हिचकिचाते नहीं, विचलित नहीं होते I अपने लक्सह्य पर निरंतर गतिशील बने रहना इनका स्वभाव होता है I ऐसे व्यक्ति बहुत कम बोलते हैं, पर जो कुछ बोलते हैं, उसमें अधिकार का भाव रहता है I आत्मविश्वास उसमें पूर्ण रूप से झलकता है I निश्चय ही ऐसे व्यक्ति सफल प्रशासक, कुशल नेता एवं मार्गदर्शक बन सकते हैं I ये अपनी प्रतिष्ठा का पूरा ध्यान रखते हैं और मान- सम्मान के प्रति पूर्णरूपेण जागरूक होते हैं I ये न तो किसी के सम्मान को ठेस पहुंचाते हैं और न अपना अपमान ही सहन कर सकते हैं I
E
अंग्रेजी वर्णमाला का यह चौथा अक्षर पूर्ण आत्मविश्वास एवं आत्मनियंत्रण का परिचायक है I ऐसे व्यक्ति जिस कार्य में भी हाथ डालते हैं, उसे सफल और सम्पन्न करके ही छोड़ते हैं I विपरीत परिस्थितियों एवं बाधाओं के आ जाने पर भी ये हिचकिचाते नहीं, विचलित नहीं होते I अपने लक्सह्य पर निरंतर गतिशील बने रहना इनका स्वभाव होता है I
ऐसे व्यक्ति बहुत कम बोलते हैं, पर जो कुछ बोलते हैं, उसमें अधिकार का भाव रहता है I आत्मविश्वास उसमें पूर्ण रूप से झलकता है I निश्चय ही ऐसे व्यक्ति सफल प्रशासक, कुशल नेता एवं मार्गदर्शक बन सकते हैं I
ये अपनी प्रतिष्ठा का पूरा ध्यान रखते हैं और मान- सम्मान के प्रति पूर्णरूपेण जागरूक होते हैं I ये न तो किसी के सम्मान को ठेस पहुंचाते हैं और न अपना अपमान ही सहन कर सकते हैं I
F
'एफ़' अक्षर पूर्णत: घरेलू है I ऐसे व्यक्ति घर की ओर पूरा ध्यान देते हैं, परिवार को सुचारू रूप से चलाना अपना नैतिक कर्तव्य मानते हैं I तथा बच्चा बनकर अपने आपको तथा परिवार को प्रसन्न रखते हैं I 
अनैतिकता इनके जीवन में नहीं होती I ये प्रेम, सच्चाई, मधुरता, परोपकार आदि जीवन मूल्यों को हमेशा श्रेष्ठ स्थान देते हैं I अपने कार्य में तत्पर ऐसे व्यक्ति समाज के भव्य सोपान कहे जा सकते हैं I
G
चरित्र की दृष्टि से ये व्यक्ति अत्युत्तम कहे जा सकते हैं I सादगी, सच्चाई एवं शिष्टता इनके व्यक्तित्व के आभूषण हैं I इनके व्यक्तित्व में ही कुछ ऐसा प्रभाव होता है कि लोग बार- बार इनकी ओर खिंचे आते हैं I ये जीवन में नैतिक मूल्यों को प्रश्रय देते हैं और उन पर कायम रहते हैं I 
इनका सारा काम योजनाबद्ध रूप से होता है I किसी भी कार्य से पहले पूरी योजना इनके मस्तिष्क में जम जाती है और फिर ये उस पर अमल करते हैं I 
इनमें गज़ब का आत्मनियंत्रण होता है I व्यवहार में मृदु एवं बातचीत में शिष्ट ऐसे व्यक्ति जीवन में पूर्णत: सफल कहे जा सकते हैं I
H
ये व्यक्ति अपने स्वार्थ में केन्द्रित तथा जरुरत से ज्यादा समझदार होते हैं I प्रदर्शनप्रिय होने के साथ- साथ ऊंचे उठने कि महत्वकांक्षा भी इनमें प्रबल होती है I ये श्रम में कम विश्वास करते हैं, पर प्रयत्न इस प्रकार करते हैं, मानो ये अत्यधिक व्यस्त एवं परिश्रमी होँ I 
सामाजिक दृष्टि से ऐसे व्यक्ति सफल एवं उन्नतिशील कहे जाते हैं I
I
हर समय हर कार्य में तत्परता इनके जीवन का विशेष गुण है I न तो आलस्य इनके पास फटकता है और न ये अपने मातहतों को आलसी देख सकते हैं I 
इनका ज्ञान गहरा होता है तथा प्रत्येक विषय को पूरा- पूरा समझने का प्रयत्न करते हैं I इनके पास अधकचरा ज्ञान नहीं होता और न ये ऐसा चाहते हैं I इनकी प्रत्येक बात में वजन होता है और जो कुछ भी कहा जाता है, अधिकारपूर्ण स्वर में कहा जाता है I
J
उन्मुक्त विचार एवं स्वतंत्रता के रक्षक ऐसे व्यक्ति संकीर्णता से परे एवं विशाल हृदय से सम्पन्न होते हैं I संसार के नित्य परिवर्तित घटनाचक्र से निकट का संबंध रखते हैं तथा नवीनतम गतिविधि से परिसूचित रहते हैं I इनसे बातचीत करते समय ऐसा प्रतीत होता है, मानो ज्ञान के सागर में डुबकियां लगा रहे हैं I छोटी- छोटी बातों पर ये ध्यान नहीं देते I मौलिकता इनके जीवन कि विशेषता होती है I 
हां, यह बात अवश्य है कि मुह पर खरी- खरी बात कह देने की इनकी आदत से लोग यथासंभव इनसे दूर रहने की ही चेष्टा करते हैं I
K
ऐसे व्यक्ति पूर्णत: संघर्षशील कहे जा सकते हैं I इनके जीवन में जीतना उतार- चढ़ाव आता है, उतना कम लोगों के जीवन में देखा जाता है I 
इनके जीवन में आकस्मिक घटनाएं विशेष रूप से घटती रहती हैं I एक दिन सर्वोच्च चोटी पर हैं, जो दूसरे ही दिन इन्हें खड्डे में गिरे हुए भी देखा जा सकता है I इनके जीवन का उत्थान- पतन अनिश्चित- सा होता है I 
ऐसे व्यक्ति एक प्रकार से निराशावादी हो जाते हैं तथा प्रत्येक कार्य के अंधेरे पक्ष को ही देखते हैं I परिस्थितियों के प्रति सादा चौकन्ने एवं धर्मभीरु ऐसे व्यक्ति सहिष्णु एवं उदार होते हैं I
L
ऐसे व्यक्ति भावुक, सहिष्णु एवं दार्शनिक होते हैं I विचारों से सुलझे हुए तथा कार्यों से श्रेष्ठ सिद्ध होते हैं I इनका प्रत्येक कार्य योजनाबद्ध होता है I छिछोरापन इन्हें पसंद नहीं I गम्भीर प्रकृति, उच्च स्तरीय पहनावा तथा अपने आपको श्रेष्ठ समझने की प्रव्रत्ति- ये तीनों ही गुण इनके जीवन की विशिष्ट उपलब्धियां हैं, जिनके बल पर ये ऊंचे उठने में समर्थ होते हैं I 
इस प्रकार ये 'रिज़र्व नेचर' के व्यक्ति होते हैं I अपने ही हाल में मस्त, अपनी ही धुन में जीवन में आगे बाधते रहते हैं, रूककर या पीछे घूमकर देखने कि इन्हें फुर्सत नहीं होती I अपने कार्यों, विचारों तथा गुणों से ये निस्संदेह उच्चतम पद पर जा पहुँचते हैं I
M
बहिर्मुखी होने के साथ- साथ ऐसे व्यक्ति सदाचारी, सभ्य एवं सुसंस्कृत भी होते हैं, परन्तु कई बार इनकी सादगी ही इनके लिए अभिशाप बन जाती है I विचारों से पवित्र होने के कारण खरी- खरी बात कह देने से भी ये नहीं चूकते I 
इन्हें जीवन में उत्थान- पतन जरुरत से ज्यादा ही देखना पड़ता है I ये गोपनीय बनने का प्रयत्न करते हैं, पर वह निभता नहीं I इनके व्यक्तित्व के चारों ओर रहस्य का एक परदा सा पड़ा रहता है I 
भ्रम इनके बारे में बना ही रहता है तथा यदि ये निर्धन भी होते हैं, तो भी लोग इनके धनवान होने का भ्रम पाले रहते हैं I 
आवश्यकताएं बढ़ी- चढ़ी, बड़प्पन प्रदर्शित करने की भावना तथा अपने आपको श्रेष्ठ सिद्ध करने की प्रवृत्ति भी इनमें कूट- कूटकर भरी होती है I
N
संघर्ष इनका सहचर, बाधाएं इनकी संगिनी एवं कठिनाइयां इनके साथ- साथ उम्र- भर चलती रहती हैं, पर इनका व्यक्तित्व इतना प्रबल, दृढ़ एवं प्रभावशाली होता है कि बाधाओं एवं संकटों से निरंतर संघर्ष करते हुए भी ये अपनी राह बनाते चलते हैं तथा लक्ष्य की ओर बिना रुके चलते रहते हैं I 
इनका व्यक्तित्व प्रभावशाली होता है तथा इनमें एक जन्मजात गुण होता है कि अपरिचित व्यक्ति को भी ये अपना मित्र बना लेते हैं ओर जिससे एक बार मित्रता स्थापित हो जाती है, उससे उम्र भर का संबंध निभाते हैं I 
ऐसे व्यक्ति सद्गृहस्थ होते हैं, सामाजिक उत्तरदायित्वों का भली प्रकार निर्वाह करते हैं तथा स्वयं कष्ट सहन करके भी परिवार को उन्नत बनाने की ओर सतत सचेष्ट रहते हैं I 
सादगीपूर्ण एवं सरल जीवन, विचारों में श्रेष्ठता, सहयोग एवं सम्मान इनके विशिष्ट गुण कहे जा सकते हैं I
O
यह अक्षर आत्मकेंद्रित, हिम्मत, दिलेरी एवं साहस का प्रतिनिधि है I जीवन में निरन्तर उतार- चढ़ाव आते रहने के बावजूद ऐसे व्यक्ति हिम्मत नहीं हारते तथा नीचे गिरकर भी ऊपर उठने की सामर्थ्य रखते हैं और उठ भी जाते हैं I 
जहां एक ओर इनके मित्रों कि संख्या असीमित होती है, वहां शत्रु एवं विरोधी भी कम नहीं होते I वे व्यक्ति भी, जो कभी उपकृत हो चुके हैं, इनके साथ धोखे का व्यवहार करते हैं I 
गंदगी, अव्यवस्था, सीमित क्षेत्र, संकुचित विचार इन्हें पसंद नहीं I ये धूम्र- युत लकड़ी की तरह सुलगना पसंद नहीं करते, अपितु भभककर चमकना पसंद करते हैं, भले ही वह एक क्षण के लिए हो I 
इनकी महत्वाकांक्षाएं उच्च होती हैं तथा शीघ्रातिशीघ्र ऊपर उठने की भावना इनमें विशेष रूप से पायी जाती है I जीवन का उत्तरार्द्ध अपेक्षाकृत सुखी एवं सम्पन्न होता है I
P
अनेक रहस्यों को अपने हृदय में छिपाये, अन्दर से हाहाकार तथा भयंकर उथल- पुथल होते हुए भी ऊपर से शांत बने रहने तथा सभी के सुख- दुःख में शामिल होने वाले ऐसे व्यक्ति जीवन कि श्रेष्ठता का प्रतिनिधित्व करते हैं I ये न तो कुत्सित विचार मन में रखते हैं और न किसी की निन्दा सुनना ही पसंद करते हैं I भीतर से साफ तथा बाहर से मधुर, यही इनके व्यक्तित्व कि विशेषता है I 
कितनी भी कठिनाई आ जाये, इनके चेहरे पर विषद की रेखा तक नहीं होती I स्वयं हानि उठाकर भी मित्रों को सहयोग देने में ये सदा तत्पर रहते हैं I कोलाहल से दूर एवं शांत वातावरण में इनका जी लगता है I ये समाज के वास्तविक आभूषण कहलाने में समर्थ होते हैं I
Q
सही एवं व्यवस्थित ढंग से जीवनयापन करना इनका अभीष्ट होता है I इनका निश्चित लक्ष्य होता है, निश्चित सिद्धान्त होते हैं और अपने विचारों तथा सिद्धांतों पर ये अडिग रहते हैं I 
इनके जीवन- क्रम में उतावली नहीं होती और व्यवस्था में ये हस्तक्षेप पसंद नहीं करते I ऐसे व्यक्ति श्रेष्ठ प्रशासक सिद्ध होते हैं तथा ऊंचे से ऊंचे पद पर जाने के बावजूद इनमें घमण्ड नहीं रहता I ज़िम्मेदारी का कुशलतम नेतृत्व एवं निर्वाह इस प्रकार के व्यक्तियों की विशेषता कही जा सकती है I
R
इन व्यक्तियों का व्यक्तित्व अत्यन्त श्रेष्ठ, मधुर एवं प्रभावशाली होता है I अनजान को भी परिचित बना लेना इनके लिए बायें हाथ का खेल होता है I ऊंचे से ऊंचे अधिकारी से काम निकलवाना इनके लिए अत्यन्त सहज होता है और यही कारण है कि ऐसे व्यक्ति साधारण स्तर के जीवन प्रारम्भ करके उच्च स्तर तक पहुंच जाते हैं I 
ऐसे व्यक्ति सही अर्थों में गुणग्राहक होते हैं I किस व्यक्ति में क्या गुण है, उसे उससे ग्रहण करके अपने जीवन में पचा लेना तथा व्यावहारिक जीवन में उसका प्रयोग करना इनकी विशेषता होती है I अपने स्वार्थ पर इनकी हर समय दृष्टि रहती है, लेकिन स्वार्थ साधन के पश्चात् परोपकार करने से भी नहीं चूकते I 
समाज में इनकी प्रतिष्ठा होती है तथा जीवन ज्यों- ज्यों आगे बढ़ता है, इन्हें सम्मान, पद, प्रतिष्ठा और पैसा अधिकाधिक मिलता जाता है I ऐसे व्यक्ति प्रौढ़ावस्था में अपेक्षाकृत सुखी देखे गए हैं I
S
ऐसे व्यक्ति बहिर्मुखी, हंसमुख, मित्र बनाने कि कला में पूर्ण निपुण तथा दूसरों से लाभ उठाने में तत्पर, योग्य एवं समझदार होते हैं I रंगमंच, नाटक, सार्वजनिक प्रदर्शन तथा उत्सव आदि में बढ़- चढ़कर भाग लेते हैं तथा जनसंपर्क में आने का अधिकाधिक प्रयत्न करते हैं I अपने अफ़सर अथवा स्वामी के प्रति ये पूर्ण वफ़ादार होते हैं तथा अपने कार्यों से उन्हें अपने प्रति आकर्षित भी कर लेते हैं I 
हां, निर्णय लेने में ये कमज़ोर होते हैं I यह कार्य करूँ या नहीं, बस, इसी उहापोह में पड़े रहते हैं तथा मित्र अथवा सलाहकार जो कुछ भी कह देते हैं, उसको मान लेते हैं I स्वतंत्र निर्णय लेना इनके वश कि बात नहीं I
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संतोषवृत्ति का यह सर्वोत्कृष्ट प्रकार है I ऐसे व्यक्ति अपने उन्नति के लिए प्रयत्नशील रहते हैं, परन्तु उसके लिए गलत तरीके नहीं अपनाते, अपितु न्याय एवं विवेक के आधार पर ही उन्नति करना चाहते हैं I 
इन्हें अपने आप पर पूरा भरोसा रहता है तथा स्वतंत्र निर्णय लेना इनका विशेष गुण होता है I किसी के दबाव में आकार ये आपनी राय नहीं बदलते तथा एक बार जो विचार स्थिर कर लेते हैं, उस पर अटल रहते हैं I 
मित्रों एवं परिचितों में ये पूर्णत: लोकप्रिय होते हैं तथा अपनी प्रसन्नता में सबको साझीदार बनाते हैं, जबकि दुःख एवं कष्ट अकेले ही भोगने को तत्पर रहते हैं I 
ईश्वर में इनकी पूर्ण आस्था होती है तथा 'सब कुछ प्रभु के आश्रित है' मानकर ही सुखद जीवनयापन करते हैं I स्वामिभक्ति, देशभक्ति एवं प्रभुभक्ति इनके विशिष्ट गुण हैं I
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ऐसे व्यक्ति नवीनतम स्थितियों, विचारों, फ़ैशन एवं कार्यों में सदा अग्रसर रहते हैं I नवीनतम फ़ैशन इनके द्वारा ही प्रारम्भ होता है I नये- से नया विचार इनके मस्तिष्क की उपज होती है तथा संसार में जो कुछ नया, विलक्षण एवं अदभुत होता है, उसे स्वीकार करने के लिए सदा तत्पर रहते हैं I 
इनके विचार सुलझे हुए एवं परिपक्व होते हैं I ये सदा सत्य की खोज में रहते हैं तथा जो कुछ, जैसा व जिस प्रकार का है, उसे साफ- साफ कह देने में नहीं हिचकते I जीवन के उज्ज्वल पक्ष की ओर इनकी सदा दृष्टि रहती है I लेकिन ऐसे व्यक्ति वर्तमान में ही जीवित रहते हैं I भविष्य इनकी चिंता करता है, ये भविष्य के प्रति पूर्णत: बे- खबर ही बने रहते हैं I
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ऐसे व्यक्ति दूसरों का सम्मान करना जानते हैं ओर चाहते हैं कि लोग भी इनका सम्मान करें, इन्हें आदर दें, समाज में प्रतिष्ठा हो तथा इनके कार्यों कि लोगों में चर्चा हो, पर इनके साथ ही इनमें अहं भावना भी प्रबल होती है, जिसके फलस्वरूप ये दूसरों को अपने से छोटा एवं निम्न समझते हैं तथा अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए सदा प्रयत्नशील बने रहते हैं I 
ग्रहण करने की शक्ति इनमें अति प्रबल होती है I नया खोजने की प्रतिभा का इनमें प्राचुर्य होता है तथा बात को युक्तियुक्त ढंग से स्पष्ट करने, समझाने एवं प्रभावित करने का विशेष गुण इनमें पाया जाता है I
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ऐसे व्यक्ति परिश्रमी तो होते ही हैं, पर साथ ही ख़तरा उठाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ते I जोखिमपूर्ण कार्य करने में ये आनन्द का अनुभव करते हैं I समुद्र लांघना, नट विद्या, दिलेरी के काम, सरकस और वे सभी कार्य, जो रोमांचक होते हैं, इनके लिए सहज एवं आनंदप्रिय होते हैं I 
इनके शरीर के अंग- प्रत्यंग में फुर्ती भरी रहती है, आलस्य इन्हें छू भी नहीं पाता तथा जो भी असंभव कार्य हो, उस कार्य को संभव बनाने के लिए बेचैन हो उठते हैं, लेकिन इनकी वृद्धावस्था दुःखद एवं चिन्तनीय होती है I
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ऐसे व्यक्ति लापरवाह होते हैं I स्वयं ही जाल बुनते हैं और स्वयं उसमें उलझते भी हैं I अपनी झूठी शेखी बघारना, गप्पे हांकना एवं बढ़- चढ़कर प्रदर्शन करना इनका प्रिय विषय होता है I 
ऐसे व्यक्ति ज़िम्मेदारी से कोसों दूर रहते हैं तथा ऐसा कोई भी कार्य अपने हाथ में नहीं लेते, जो महत्वपूर्ण हो I 
इस प्रकार के व्यक्तियों को सर्वथा असफल कहा जाता है I
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अपने आप में ही मस्त रहने वाले तथा आत्मकेंद्रित, ऐसे व्यक्ति जीवन से कटे हुए रहते हैं I जीवन में किसी एक ध्येय को स्वीकार कर लेते हैं और जीवन भर उसमें डूबे रहते हैं I 
संसार में इनका योगदान अपने ढंग का अनोखा ही होता है I
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तुनकमिज़ाज, हठी, दूसरों को समाप्त करने की भावना, युगों- युगों का वैर पालते हुए ऐसे व्यक्ति क्रोधी एवं अविवेकी कहे जा सकते हैं, पर वीरता के क्षेत्र में अद्वितीय एवं कूटनीति में निपुण भी होते हैं I